चुनावी साल का रेलवे बजट

लगभग दो दषक से भी ज्यादा समय के बाद कांग्रेस के किसी रेल मंत्री का यह पहला रेलवे बजट है। गौरतलब है कि 21 जनवरी 2013 से यात्री किरायों में 7 फीसदी से 40 फीसदी तक वृद्धि पहले ही की जा चुकी है। पिछली बार के रेलवे बजट 2012-13 को प्रस्तुत करते हुए ममता बेनर्जी की पार्टी त्रिणमूल कांगे्रस के दिनेष त्रिवेदी ने यह कहा था कि रेलवे भारी कठिनाई से गुजर रही है। इसकी भूमिका यह थी कि पिछले 10 सालों से रेल के यात्री किराये और भाड़ों में कोई वृद्धि नहीं की गई। पिछले साल जब रेलवे मंत्री दिनेष त्रिवेदी ने रेल किराए बढ़ाने का प्रस्ताव किया तो तृणमूल कांगे्रज सुप्रीमो ममता बेनर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया तो इसे वापिस ले लिया गया और इस कारण से दिनेष त्रिवेदी को अपनी कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ा।

रेलवे के स्वास्थ्य का एक संकेत परिचालन अनुपात होता है। परिचालन अनुपात से हमारा अभिप्राय है कि रेलवे को 100 रूपया कमाने के लिए कितना व्यय करना पड़ता है। 2008-09 में यह अनुपात 90.5 था जो बढ़कर 2009-10 में 94.7 हो गया। वर्ष 2010-11 की पहली छमाही में यह बढ़कर 125 तक पहुंच गया था। परिचालन अनुपात का बढ़ना चिंता का प्रमुख कारण था। परिचालन अनुपात इसलिए बढ़ रहा था क्योंकि एक ओर तो लागत बढ़ रही थी और दूसरी ओर पिछले कई वर्षों से किराये भाड़े में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। इसके बाद रेल माल भाडे को बढ़ाने से परिचालन अनुपात घटकर 100 तक पहुंच गया, लेकिन यात्री किरायों को फिर भी नहीं बढ़ाया गया। वर्ष 2007-08 में रेलवे की परिचालन लागत मात्र 41033 करोड़ रूपये थी, जो 2012-13 में (संषोधित अनुमान) 84,400 करोड़ रूपये तक पहुंच गई। इस काल खंड में मात्र पेंषन पर खर्च ही लगभग 8000 करोड़ से 20000 करोड़ तक पहुंच गया है।

जनवरी 2013 से जो रेल किराये बढ़ाए गए उसका साफ-साफ असर रेलवे मंत्री के मनोबल और बजट पर दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि रेलवे का परिचालन अनुपात रेलमंत्री के अनुसार 2012-13 में 88.8 फीसदी तक पहुंच चुका है। वर्ष 1997-98 के बाद यह न्यूनतम है। वर्ष 2013-14 के लिए तो रेलमंत्री ने 87.8 फीसदी तक हो जाने का अनुमान जताया है। यही नहीं आगामी वर्ष में रेलवे फंड में 12,506 करोड़ रूपये का अतिरेक बच जायेगा। 2013-14 में सकल प्राप्तियां 2012-13 की तुलना में 18000 करोड़ से भी ज्यादा रहने वाली है।

देश में सस्ता परिवहन उपलब्ध कराने के संबंध में रेलवे का कोई सानी नहीं है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में रेलवे के विकास के लिए 7.35 लाख करोड़ रूपये का निवेश किया जाना है। रेल बजट में 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 2.5 लाख करोड़ रूपये की बजटीय सहायता की उम्मीद रखी गई है। आम बजट में सरकार पर पहले से ही खर्च घटाने का दबाव है इसलिए रेलवे के विकास के लिए भी सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। वर्ष 2013-14 में योजनागत निवेष 63,363 करोड़ रूपये रहेगा। जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 26000 करोड़ रूपये उपलब्ध कराए जायेंगें और 14,260 करोड़ रूपये रेलवे द्वारा जुटाए जायेंगे, शेष राषि उधार और निजी निवेष द्वारा मिलेंगे।

अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां देश में सड़कों की लम्बाई आजादी के बाद 4 लाख किलोमीटर से ग्यारह गुणा बढ़कर 44 लाख किलोमीटर पहुंच गयी, रेलवे लाइनों का विस्तार 54000 किलोमीटर से बढ़कर मात्र 20 प्रतिशत से भी कम बढ़कर 64000 किलोमीटर तक ही पहुंच सका। यही नहीं कि भारतीय रेल 230 लाख यात्रियों को रोज ले जाती है और हर वर्ष 2650 लाख टन वस्तुएं इसके द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जायी जाती हैं, भारतीय रेल परिवहन क्षेत्र में लागतों को कम करने के लिए बहुत जरूरी साधन है। रेलवे का माल भाड़ा सड़क के माल भाड़े से मात्र एक तिहाई ही है। लंबी दूरी की यात्रा में तो रेलवे का कोई विकल्प ही नही है, कम दूरी की यात्रा में भी रेलवे के किराए बस की यात्रा किराए से आधे ही रहते हैं। इस प्रकार रेलवे का विकास देश के परिवहन के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है।

जनवरी 2013 में बढाए गए किरायों के बाद रेलमंत्री ने किराए भाड़ों में भारी वृद्धि से तो परहेज किया है, लेकिन फिर भी ईंधन लागत समायोजन के नाम पर रेल भाड़े में वृद्धि जरूर की गई है। जनवरी में किराए में की गई वृद्धि के चलते जो राजस्व में वृद्धि हुई उसका अनुकूल असर रेलवे के विकास पर होना संभव है। हालांकि फिलहाल 2012-13 के नई लाईनों के लक्ष्यों को 700 किमी से घटाकर 470 किमी किया गया है और गेज परिवर्तन के लक्ष्य को 800 किमी से घटाकर 575 किमी किया गया है। हालांकि लाईनों को दोहरा किए जाने तथा विद्युतिकरण के लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया जायेगा। किरायों के बढ़ने के साथ 12वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्यों को बहतर ढंग से प्राप्त करना संभव हो पायेगा। इस संबंध में रेल मंत्री का यह सुझाव कि समय के साथ हर वर्ष 5 से 6 प्रतिषत किरायों में वृद्धि अगले 10 साल में 1 लाख करोड़ रूपया जुटा पायेगी, रेलवे के विकास और यात्री सुविधाओं के लिए यह एक जरूरी और दूरगामी कदम होगा।

पहले से ही किरायों में वृद्धि किए जाने के कारण रेलमंत्री के पास पर्याप्त संसाधनों के चलते रेलवे की बचत और 12वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार भारी निवेष और निजी क्षेत्र के सहयोग के कारण रेलवे के विकास के नए रास्ते खुले हैं। पर्याप्त संसाधनों के कारण नई लाईनें बिछाने, लाईनों के दोहरीकरण और विद्युतीकरण में नए-नए क्षेत्रों के जिक्र और नई रूटों को शुरू करने को इस चुनावी वर्ष में खासा भुनाया जायेगा, इसमें कोई शक नहीं है।

डाॅ. अश्विनी महाजन
एसोसिएट प्रोफेसर, पीजीडीएवी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
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