Dr Ashwani Mahajan

Once policy interest rates are reduced, demand for credit to build roads, bridges, airports and other infrastructure will go up.

On April, 2016, the Reserve Bank of India (RBI) announced its first Monetary Policy Review for the financial year 2016-17. While continuing the trend of reducing interest rates, the repo rate (interest rate at which banks borrow from the RBI) has been reduced from 6.75% to 6.50% and cash reserve ratio (CRR) has been kept intact at 4.0%.

बजट 2013-14 संसद में पेश हो चुका है। गौरतलब है कि यह यूपीए की दूसरी पारी का आखिरी बजट है, क्योंकि 2014 में सरकार ‘वोट आन एकाउण्ट’ ही प्रस्तुत कर पायेगी। संयोग से यूपीए की पहली पारी के अंतिम बजट को भी 2008 में वर्तमान वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने ही पेश किया था। वित्तीय आंकड़ों को लोकलुभावन रूप में प्रस्तुत करने की अपनी उस्तादी के लिए पहले से ही पी.चिदंबरम प्रसिद्ध है।

बजट 2013-14 का आगाज देता हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2012-13 संसद में पेश हो चुका है। पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और उसके बाद सरकार के अपने केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने 2012-13 की प्रत्याषित ग्रोथ रेट को घटाकर 5 प्रतिषत कर दिया तो सरकार के पास आर्थिक सर्वेक्षण में कोई अन्य आंकड़ा देना संभव नहीं था। लेकिन साथ ही सरकार ने ग्रोथ रेट मंद होने को एक खतरे की घंटी जरूर बताया। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ लगभग शून्य चल रही है। पिछले आर्थिक सर्वेक्षण ने 2012-13 के लिए 7.6 प्रतिषत ग्रोथ की अपेक्षा बताई थी। इसका मतलब यह है कि सरकार के अनुमान पूर्णतया गलत सिद्ध हो चुके हैं। हालांकि 20

The benefit of transfer of cash based on Aadhaar card may reach the foreigners too along with Indians.

आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 में सरकार ने यह माना है कि गत वर्ष में कीमत स्थरता और आर्थिक संवृद्धि दो प्रमुख चुनौतियां रही हैं। सरकार दावा करती है कि इस वर्ष के अंत तक आते-आते खाद्य मुद्रा स्फीति को शून्य तक पहुंचाया जा सका है। अंतर्राष्ट्रीय उठक-पठक का हवाला देते हुए सरकार ने पिछले 9 वर्षों में (2008-09 के अपवाद को छोड़कर) 6.9 प्रतिशत की सबसे कम आर्थिक संवृद्धि अनुमानित होने पर भी लगभग संतोष जताया है। सरकार ने स्वीकार किया है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2010-11 में 9 प्रतिशत आर्थिक संवृद्धि की अपेक्षा रखी थी। यदि ऐसा हो पाता तो अर्थव्यवस्था की काफी समस्याएं कम हो जाती। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया

Companies Bill 2011 was presented in the Parliament during the winter session. Apart from other things, there are several new provisions in the bill, which include provisions with regard to corporate social responsibility, mandatory rotation of Auditors, independent directors, one-man company etc. Of course, when a new law is enacted, it is expected that it will help solving the problems with respect to the existing law. If this bill becomes a law, it will replace the Indian Companies Act, 1956.

एकल (सिंगल) ब्रांड खुदरा में विदेशी निवेश की अनुमति सर्वप्रथम 51 प्रतिशत की सीमा तक फरवरी 2006 में प्रदान की गई। बहु (मल्टी) ब्रांड में विदेशी निवेश देश में व्यापक विरोध के कारण अभी भी प्रतिबंधित है। देश के खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश का पहला अनुभव तभी आ गया था जब थोक व्यापार की आड़ में ‘कैश एण्ड कैरी’ थोक व्यापार में विदेशी निवेश को अनुमति दे दी गई थी। सैद्वांतिक रूप से तो इसे अनुमति दे दी गई थी, लेकिन पहले इस क्षेत्र में विदेशी निवेश सरकारी अनुमति के माध्यम से ही संभव था। लेकिन वर्ष 2006 से अब इसे स्वचालित मार्ग से कर दिया गया। नवंबर 2011 में केन्द्रीय केबिनेट ने सिंगल ब्रांड खुदरा में वि

रेल मंत्री के रूप में पहली बार अपना बजट पेश करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने स्वयं ही स्वीकार किया है कि भारतीय रेलवे अत्यंत कठिनाई के दौर से गुजर रही है। इस कठिनाई की भूमिका यह है कि पिछले 8 बजटों में रेल के यात्री किराये और भाड़ों में कोई वृद्धि नहीं की गई। स्वयं रेलवे की परिचालन लागत भी इस दौरान काफी बढ़ी है। 5 वर्ष पूर्व 2007-08 में रेलवे की परिचालन लागत मात्र 41,033 करोड़ रूपये थी, जो 2011-12 के बजट अनुमानों के अनुसार 73,650 करोड़ रूपये तक पहंुच गई। इस कालखंड में मात्र पेंशन पर ही खर्च लगभग 8 हजार करोड़ से बढ़कर 16 हजार करोड़ तक पहुंच गया है।

स्विटजरलैंड की एक दवा कंपनी नाॅवरेतीस और भारत सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक मुकदमा चल रहा था, जिसका फैसला 1 अप्रैल 2013 को सुनाया गया। इस मामले में स्वदेशी जागरण मंच की महत्वपूर्ण भूमिका के संदर्भ में मंच द्वारा हस्तक्षेप का निवेदन किया गया और उसे स्वीकार करते हुए स्वदेशी जागरण मंच के पक्ष को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीरता से सुना गया। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नाॅवरेतीस कंपनी के दावे को खारिज कर दिया। मुकदमें में नाॅवरेतिस कंपनी का कहना था कि भारत सरकार उसकी एक दवा ‘ग्लीवैक’ के लिए पेटेंट प्रदान नहीं कर रही। इसके चलते यह कंपनी अपनी बनाई हुई दवा पर एकाधिकार नहीं रख सकती। कंपनी का कहना था कि

लगभग दो दषक से भी ज्यादा समय के बाद कांग्रेस के किसी रेल मंत्री का यह पहला रेलवे बजट है। गौरतलब है कि 21 जनवरी 2013 से यात्री किरायों में 7 फीसदी से 40 फीसदी तक वृद्धि पहले ही की जा चुकी है। पिछली बार के रेलवे बजट 2012-13 को प्रस्तुत करते हुए ममता बेनर्जी की पार्टी त्रिणमूल कांगे्रस के दिनेष त्रिवेदी ने यह कहा था कि रेलवे भारी कठिनाई से गुजर रही है। इसकी भूमिका यह थी कि पिछले 10 सालों से रेल के यात्री किराये और भाड़ों में कोई वृद्धि नहीं की गई। पिछले साल जब रेलवे मंत्री दिनेष त्रिवेदी ने रेल किराए बढ़ाने का प्रस्ताव किया तो तृणमूल कांगे्रज सुप्रीमो ममता बेनर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया तो इसे व