राष्ट्रीय परिषद बैठक, गुवाहाटी-असम (20-21 मई 2017)

राष्ट्रीय परिषद बैठक, गुवाहाटी-असम (20-21 मई 2017) की कार्यवाही एवं लिए गए निर्णय

मान्यवर,

दिनांक 20 मई 2017 को गुवाहाटी (असम) स्थित ‘श्रीमत शंकरदेव कला केंद्र’ के मनोरम परिसर में प्रातः 10.30 बजे मंच की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद बैठक का शुभारंभ भारत माता, राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्रों के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।

मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरूण ओझा, अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल, सह संयोजक गण श्री सरोज मित्र, प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी, डॉ. अश्वनी महाजन, श्री आर.सुन्दरम्, अखिल भारतीय सह विचार विभाग प्रमुख श्री सतीश कुमार तथा विद्या भारती के प्रतिनिधि श्री जी.आर. जगदीश, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री रमाकांत भारद्वाज, आरोग्य भारती से श्री भास्कर कुलकर्णी एवं मंच के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य श्री लक्ष्मीनारायण भाला सहित स्वदेशी जागरण मंच के सभी केंद्रीय पदाधिकारी मंच पर विराजमान थे।

श्री अरूण ओझा ने बैठक प्रारंभ करते हुए कहा कि मंच के गठन के समय 1991 से ही उत्तर पूर्व का क्षेत्र किसी बड़े कार्यक्रम के आयोजन से अछूता था। भव्य राष्ट्रीय परिषद बैठक का आयोजन आज गुवाहाटी में हो रहा है, यह कार्यकर्ताओं के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस आयोजन में महती भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं को साधुवाद ज्ञापित किया। उत्तर पूर्व के बारे में उन्हों ने कहा कि यह क्षेत्र रमणीय व सांस्कृतिक वैभव से परिपूर्ण क्षेत्र है। साथ ही साथ यह भारतवर्ष का वह हिस्सा है जो सामरिक, राजनैतिक व सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है। जिनके परिसर में यह बैठक हो रही है, ऐसे श्रीमत शंकरदेव न केवल वैष्णव संत थे, अपितु असमिया संस्कृति को बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। बाबा ब्रह्मपुंत्र का भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है।

वृत्त निवेदनः कुरूक्षेत्र की राष्ट्रीय सभा के उपरांत विभिन्न प्रांतों में संपन्न की गई गतिविधियों का वृृृृृृृत्त निम्नलिखित कार्यकर्ताओं ने प्रस्तुत किया -
विद्या भारती-श्री जी.आर. जगदीश, लघु उद्योग भारती-श्री रमाकांत भारद्वाज, तमिलनाडू-श्री श्रीधरन, कर्नाटक-श्री प्रदीप कुमार, श्री के.जगदीश राव, केरल-आंध्र प्रदेश-तेलंगाना- श्री आर. सुन्दरम, मध्य प्रदेश-श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह चंदेल, हिमाचल प्रदेश-श्री कृष्ण कुमार (क्षेत्रीय बैठक), श्री नरोत्तम ठाकुर, हरियाणा- श्री कमलजीत, पंजाब-श्री कृष्ण कुमार, दिल्ली- श्री रविन्द्र सोलंकी, राजस्थान- श्री धर्मेन्द्र दुबे, उत्तराखंड-श्री सुरेन्द्र सिंह, पश्चिमी उत्तर प्रदेश-डॉ. राजीव कुमार, अवध-श्री भोलानाथ मिश्रा, श्री पृथ्वीपति सचान, बिहार-श्री दिलीप निराला, उड़ीसा-श्री रमाकांत पात्रा (सहसंयोजक), झारखंड-श्री अमरेन्द्र सिंह, बंगाल-श्री सुब्रत मंडल, उड़ीसा-श्री निर्मल षडंगी, सिक्किम-श्री नवीन शर्मा (सहसंयोजक), गुजरात, महाराष्ट्र-श्री अजय पत्की, महिला क्षेत्र-डॉ. अमिता पत्की, प्रचार विभाग डॉ. निरंजन सिंह

राष्ट्रीय स्वदेशी-सुरक्षा अभियानः वैश्वीकरण के एवं स्वदेशी जागरण मंच के 25 वर्ष पूर्ण होने पर तथा चीन से चुनौती को लेकर देश भर में अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत चीन से चुनौती को लेकर अभियान प्रमुख श्री सतीश कुमार ने विस्तार से चर्चा की। अभियान के प्रथम चरण की समाप्ति पर दिनांक 11 मई को देश के 400 जिलों में 75 लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों के साथ जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया गया। चर्चा का विस्तृत विवरण संलग्न है।

पारित प्रस्तावः
1. भूमंडलीकरण के अंत का समय - इसका वाचन श्री आर.सुन्दरम ने किया।
2. चीनी प्रभाव से मुक्त हो भारत - इसका वाचन डा. अश्वनी महाजन ने किया।

रामलीला मैदान कार्यक्रमः दिनांक 29 अक्टूबर 2017 को दिल्ली के रामलीला मैदान में वर्ष भर चलाये गये ‘‘राष्ट्रीय स्वदेशी-सुरक्षा अभियान’’ का समारोप करते हुए एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। इसमें विभिन्न प्रांतों ने 1 लाख 50 हजार की संख्या में नागरिकों को जुटाने का लक्ष्य निश्चित किया। इसमें केरल, सिक्किम, गुजरात, जम्मू कश्मीर से लेकर देश के सभी प्रांतों से भागीदारी रहेगी।

इसमें प्रचार की विशेष भूमिका रहेगी। अतः इसके लिए बैनर/होर्डिंग/सोशल मीडिया/प्रिंट मीडिया प्रचार के लिए जितने भी तरीको हो सकते है, उनका प्रयोग करना है। सितंबर, अक्टूबर में इसे अधिकतम सीमा तक ले जाना है।

विशेष व्याख्यानः प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी ने वैश्वीकरण के विषय पर विस्तार से कार्यकर्ताओं को जानकारी प्रस्तुत की।
डॉ. अश्वनी महाजन ने जीएम फसलों एवं जनस्वास्थ्य की नीतियों पर विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की।
श्री आर.सुन्दरम ने वैश्वकीरण की नीतियों से वापसी (Deglobalisation) के विषय में विस्तार से चर्चा की।

राष्ट्रीय विचार वर्ग :
1. पूर्वी क्षेत्र - 9,10,11 जून 2017, दुमका (झारखंड) के वासुकीनाथ में आयोजित होगा। श्री सचिन्द्र कुमार बरियार इस वर्ग के प्रमुख के रूप में दायित्व निर्वहन करेंगे।
2. पश्चिमी क्षेत्र - 25-26 जून 2017, शिरड़ी (महाराष्ट्र), वर्ग प्रमुख-श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह चंदेल
3. उत्तर क्षेत्र - 9, 10, 11 जून 2017, मोहाली (चंडीगढ़), वर्ग प्रमुख-श्री कृष्ण कुमार शर्मा
4. उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड - 24,25,26 जून 2017, हरिद्वार (उत्तराखंड), वर्ग प्रमुख-डॉ. राजीव कुमार
5. दक्षिण क्षेत्र का विचार वर्ग प्रांतों के अनुसार लगेगा। कर्नाटक-10,11,12 जून, बेंगलूरू
विचार वर्गों में चीन का विषय रखने के लिए संघ ने भी कुछ वक्ता तैयार किए हैं। उन्हें भी इन वर्गों में आमंत्रित किया जा सकता है।
विचार वर्गों में प्रशिक्षण के लिए केंद्र की आरे से निम्नलिखित विषयों का चयन किया गया है -
स्वदेशी विकास यात्रा, स्वदेशी की अवधारणा एवं व्यवहार, चीन का आर्थिक संकट, आर्थिक सुधारों की समीक्षा, राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान, एफडीआई वर्तमान परिदृश्य, जीएम फसलें, एकात्म मानववाद, कार्यकर्ता एवं कार्य पद्धति

नई नियुक्तियां :
1. श्री श्रीधरन, तमिलनाडू - सह प्रांत संयोजक
2. श्री इलम सम्पत, तमिलनाडू - सह प्रांत संयोजक
3. श्री के.जगदीश राव, कर्नाटक संगठक एवं तेलंगाना संपर्क प्रमुख
4. प्रो. सतीश आर्चाय (उदयपुर) - सह प्रांत संयोजक, राजस्थान
5. प्रो. आशुतोष भारद्वाज - प्रांत संयोजक, जम्मू कश्मीर
6. श्री पवन बडू - क्षेत्र संपर्क प्रमुख (उत्तर क्षेत्र)
7. श्री विपिन राणा - पश्चिमी उ.प्र. एवं उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी प्रमुख
8. श्री सचिन्द्र वरियार - क्षेत्र संयोजक, झारखंड एवं बिहार
9. श्री दिलीप निराला - क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख (बिहार व झारखंड)
10. डॉ. संजीव कुमार सिंह - बिहार प्रांत विचार विभाग प्रमुख
11. श्री विनोद सिंह - प्रांत संपर्क प्रमुख, बिहार
12. श्री हेमकरण शर्मा - प्रांत संयोजक, सिक्किम
13. श्री नवीन शर्मा - सह प्रांत संयोजक, सिक्किम
14. श्री कृष्ण बहादुर, सिक्किम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
15. श्री परमात्मा शरण गुप्त, सिक्किम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
16. श्री रूद्रमणि, सिक्किम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
17. श्री सुरेश बहादुर सिंह, प्रयाग - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
18. श्री मनोज सिंह, झारखंड - सहसमन्वयक (सीबीएमडी)
19. श्री दिलीप हजारिका, असम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
20. श्री प्रशांत भूयां, असम - सह प्रांत संयोजक
21. श्री सुमन बरूआ, असम - कोष प्रमुख, असम
22. श्री रितुरंजन हातिमुनिया, असम - सहकोष प्रमुख, असम
23. श्री रार्बट लुम्फोई, असम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य
24. श्री प्रवीण हजारिका, असम - राष्ट्रीय परिषद सदस्य

संगठनात्मकः मंच के अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल ने देश भर से आये हुए प्रतिनिधियों से उनकी प्रतिक्रियाएं प्राप्त की। उन्होंने मंच के विस्तार के लिए कुछ बिंदू सुझाएं। इनमें से प्रमुख बिंदू निम्नलिखित है- अधिक से अधिक पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं का निर्माण करना, दायित्ववान कार्यकर्ता 15 दिन का प्रवास करे, प्रत्येक प्रांत में न्यूनतम 2 पूर्णकालिक कार्यकर्ता रहें, सभी जिलों एवं प्रांतों में सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किये जाये।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से 29 अक्टूबर के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करने का आह्वान किया तथा अपने-अपने प्रांतों में अक्रामक तरीके से हर प्रकार का (नुक्कड नाटक, पत्रक वितरण, चलो-दिल्ली सम्मेलन, सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, दीवार लेखन, मशाल जुलूस, पद यात्राएं आदि-आदि) प्रचार माध्यमों का उपयोग करने का सुझाव देते हुए यह भी कहा कि रामलीला मैदान में आने के लिए अपने प्रस्थान बिंदू से लेकर रामलीला मैदान तक पहुंचने के मार्ग में ढ़ोल मंजीरे, नाटक मंडली, भजन-कीर्तन करते हुए भी अपनी रेल, बस आदि अन्य वाहनों पर भी बैनर-पोस्टर लगायें।

अन्यः श्री सरोज मित्र ने मंच की भूमिका के बारे में कहा कि मंच एक आंदोलन है तथा देश भर में स्वदेशी मुद्दों पर काम कर रहें विभिन्न संगठनों के लिए अम्ब्रेला ऑर्गेनाईजेशन के रूप में इसका स्वरूप है। हमें सदैव यह ध्यान रखना होगा कि हम एक इतिहास रच रहे है। स्वदेशी पत्रिका के विस्तार के संबंध में चर्चा हुई। राष्ट्रीय परिषद बैठक में देश भर से 100 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। व्यवस्थाओं को लेकर सभी प्रतिनिधियों ने असम के कार्यकर्ताओं की भूरी-भूरी सराहना की।

समारोपः डॉ. अश्वनी महाजन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि हम सबने मिलकर 29 अक्टूबर 2017 को रामलीला मैदान के कार्यक्रम को पूरी शक्ति के साथ सफल करना है। श्री अरूण ओझा ने कहा कि अब हम सब रामलीला मैदान में मिलेंगे तथा उस दिन स्वदेशी जागरण मंच का एक नये स्वरूप में अवतरण विश्व को दिखाई देगा। बंदेमातरम् के गान के साथ राष्ट्रीय परिषद की बैठक संपन्न हो गई।

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