राष्ट्रीय परिषद बैठक, नई दिल्ली (29-30 अक्टूबर 2017)

राष्ट्रीय परिषद बैठक, नई दिल्ली (29-30 अक्टूबर 2017) की कार्यवाही एवं लिए गए निर्णय

मान्यवर,

दिनांक 29 अक्टूबर को रात्रि 8.00 बजे स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद बैठक का प्रारंभ मंच के नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुआ। बैठक प्रारंभ करते हुए श्री अरूण ओझा ने इसी दिन रामलीला ग्राउंड के ऐतिहासिक मैदान में 1.5 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी में संपन्न हुई स्वदेशी महारैली का उल्लेख किया। साथ-ही-साथ राष्ट्रीय परिषद सदस्यों से रैली के संबंध में अपने-अपने विचार व्यक्त करने के लिए आह्वान किया।

बैठक में उपस्थित अधिकांश सदस्यों ने रैली के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये। संख्या, व्यवस्थाएं, मंच, समाज के विभिन्न वर्गों के नेताओं की भागीदारी, वक्ता, शीर्ष नेतृत्व के द्वारा सभागार में जुलूस की शक्ल में भ्रमण, आवास, स्वागत, भोजन, प्रचार सहित लगभग सभी बिंदुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किये। लगभग सभी कार्यकर्ता संतुष्ट एवं उत्साहित थे। अनेक कार्यकर्ताओं ने इस रैली के फलस्वरूप उत्पन्न हुए वातावरण को स्वदेशी के कार्य विस्तार में प्रयोग करने के भी सुझाव दिये। कुछ कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम को 2005 के बाद का कुंभ भी कहा। इस रैली से सरकार, समाज को संदेश तो गया ही, साथ-ही-साथ मंच के कार्यकर्ताओं को भी स्वयं के बारे में तथा मुद्दे की शक्ति के बारे में अहसास हुआ।

सभी प्रांतों से आये हुए प्रांत संयोजकों के द्वारा दी गई संख्या का आकलन करते हुए यह अनुमान आया कि देश भर के स्वदेशी जागरण मंच के 68759 कार्यकर्ताओं सहित कुल 1.5 लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया।

विशेष उल्लेखः राष्ट्रीय परिषद की बैठक में श्री भगवती प्रकाश ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि कुल 119 देशों के विश्व भूखमरी सूचकांक में वर्ष 2011 में भारत का स्थान 67वां था जो कि 2014 में 55वां रह गया था। किंतु अब यह पुनः वर्ष 2015 में 80वें, 2016 में 97वें स्थान पर था, वह अब बढ़कर 100वें स्थान पर आ गया है। जिस देश का स्थान जितना ज्यादा होता है उसकी हालत उनती ही खराब मानी जाती है। भारत की स्थिति इस मामले में श्रीलंका तथा बंग्लादेश से भी बदतर हो गई है। जो कि चिंताजनक है। देश में 2014 की तुलना में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। दिनांक 6 फरवरी 2017 को श्रममंत्री श्री बंडारू दत्तात्रेय ने संसद में बताया कि वर्ष भर में 30 दिन का रोजगार नहीं पाने वाले नागरिकों का अनुपात 2014 में 3.4 प्रतिशत था जो कि 2017 में बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई है। देश के 77 प्रतिशत परिवारों में केवल एक सदस्य को भी वर्ष भर का नियमित रोजगार नहीं है। आर्थिक सहयोग विकास संगठन (ICD) के अनुसार देश में 30.8 प्रतिशत युवा पूर्णतः बेरोजगार हैं (अर्थात जिन्हें आंशिक रोजगार भी नहीं मिल पाता।)। ऐसे युवा जिनकी आयु 15 से 29 वर्ष के बीच की है तथा जिनके पास केई शिक्षा, प्रशिक्षण अथवा रोजगार नहीं है (NEET-No Employment, Eduction, Training Youth) भारत की स्थिति ऐसे मामलों में विश्व में दक्षिण अफ्रीका के बाद दूसरी है। भारत विश्व में रूस के बाद दूसरे नंबर का सर्वाधिक आय विषमता वाला देश बन गया है। यहां उपर के एक प्रतिशत लोगों के पास 58 प्रतिशत संपत्ति है तथा अगले 10 प्रतिशत लोगों के पास 18 प्रतिशत संपत्ति है। नीचे से देखें तो सबसे गरीब 10 प्रतिशत जनता के पास 0.2 प्रतिशत संपत्ति है। बेकार हो गये बच्चे (Wasted Child) जो कि 21 प्रतिशत होते थे वे बढ़कर 38 प्रतिशत हो गये हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक लाख करोड़ रूपये बुलेट ट्रेन का ठेका जापान को ना देकर भारत में ही दिया जाता तो भारत की न्यूनतम 50 लाख करोड़ रूपये की आर्थिक गतिविधियां बढ़ती, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता। इस प्रकार से सौर उर्जा क्षेत्र के उपरांत यह एक और अवसर हमने खो दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि और लघु उद्योग जिसमें कि देश का 78 प्रतिशत जनता संलग्न है, उसका जीडीपी मात्र 3 प्रतिशत ही बढ़ा है। वहीं दूसरी ओर 22 प्रतिशत जनता की भागीदारी वाला सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र, शिक्षा-चिकित्सा जैसे अन्य सेवा क्षेत्रों का जीडीपी 10 से 12 प्रतिशत बढ़ा है। जिसके फलस्वरूप देश की औसत जीडीपी ग्रोथ 6 प्रतिशत के आसपास हो जाती है। चिकित्सा क्षेत्र का जीडीपी भी जो कि 22 लाख करोड़ रूपये का हो गया है, उसका कारण यह नहीं है कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक खर्च करना प्रारंभ कर दिया बल्कि वास्तविकता यह है कि उसमें मेदांता जैसे अति महंगे अस्पतालों का योगदान है। उन्होंने कहा कि चीन से आयात को लेकर भारत की स्थिति गंभीर हो गई है। भारत सरकार द्वारा एंटी डंपिंग डयूटी जैसे किये जा रहे उपाय केवल दिखावटी उपाय है। शिक्षा क्षेत्र में 60 प्रतिशत बच्चें प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे है। 50 प्रतिशत बच्चें प्राइवेट कालेजों एवं तकनीकी महाविद्यालयों में शिक्षा पा रहे हैं।

विश्व भर में किसी देश में भी ऐसी कोई भी सक्सेस स्टॉरी नहीं है कि उस देश ने एफडीआई पर आश्रित तथा आधारित होकर अपना विकास किया हो। ऐसी स्थिति से निकलने के लिए हमें स्थानीय स्तरों पर देश के विभिन्न औद्योगिक संकुलों को मजबूत करने के लिए थिंक टैंक तथा एक्शन ग्रुप बनाने पड़ेगें। उसी आधार पर हमें विकेंद्रित योजनाएं भी पंचायत एवं शहर स्तर पर बनानी होगी।

10-13 दिसंबर 2017 अर्जेन्टीना में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 11वीं मंत्रीस्तरीय बैठकः मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक डॉ. धनपतराम अग्रवाल ने बताया कि विश्व व्यापार संगठन के समझौते कुल 13 हजार पृष्ठों में समाहित है। इस बैठक में उठाये जाने वाले निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के बारे में विस्तार से बताते हुए सदस्यों का ध्यान आकर्षित किया।
1. पीस क्लॉज- खाद्य सुरक्षा को लेकर बनाये गये इस प्रावधान को 10वीं बैठक में समाप्त किया जाना था, किंतु इसे अगली बैठक के लिए स्थगित कर दिया गया था। जो कि अब इस बैठक में उठाया जायेगा।
2. ई-कॉमर्स, 3. बौद्विक संपदा अधिकार कानून

वर्ष 2001 में डब्ल्यूटीओ का सदस्य बने चीन के बारे में उन्होंने कहा कि उसने स्वयं को मार्किट इकोनॉमी बनाने के लिए 15 वर्षों की मोहलत मांगी थी किंतु वह ऐसा करने में असफल रहा है। इस विषय को भी बैठक में उठाया जाना चाहिए।

डॉ. अश्विनी महाजन ने चर्चा में भाग लेते हुए बताया कि इस बैठक में स्वदेशी जागरण मंच के 10 प्रतिनिधियों का दल भाग लेगा। डब्ल्यूटीओ की बैठक में मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े मछुवारों का मुद्दा भी रहेगा। इसके अंतर्गत केवल पंजीकृत मछुवारों को ही सरकार के द्वारा सब्सिड़ी दी जा सकेगी, अपंजीकृत को नहीं। स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार को इस बात के लिए राजी करवा लिया है कि पंजीकृत के अलावा ‘ट्रेडिशनल मछुवारें’ शब्द को भी इसमें सब्सिड़ी के लिए सम्मिलित किया जायेगा। ई-कॉमर्स के संबंध में उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ के समझौतों में ई-कॉमर्स का समझौता नहीं है। ई-कॉमर्स के विषय पर सरकार Explicive Consensus के प्रावधान का उपयोग करके इसे रोक सकती है। किंतु सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अज्ञानतावश इसे आर.सी.ई.पी. में सम्मिलित कर लिया है। ई-कॉमर्स के हम विरोधी नहीं है, किंतु इसके नियम डब्ल्यूटीओ नहीं, हम बनायेंगे। जहां तक पीस क्लॉज़ का संबंध है तो इसका स्थायी हल निकालना पड़ेगा। वास्तव में डब्ल्यूटीओ के प्रारंभिक समझौतों में इसका समझौता ही गलत हुआ है। जहां एक ओर अमरीका अपने किसानों को 54 हजार डॉलर की वार्षिक सब्सिड़ी देता है, वहीं भारत केवल 108 डालर की सब्सिड़ी ही देता है।

राष्ट्रीय स्वदेशी-सुरक्षा अभियान एवं स्वदेशी महारैली के अनुवर्तन प्रयास- अभियान प्रमुख श्री सतीश कुमार ने वर्ष भर चले अभियान के विभिन्न पड़ाव की जानकारी प्रस्तुत की। उपलब्धियों के नाते उन्होंने एक करोड़ तीस लाख हस्ताक्षर, 450 जिलों में ज्ञापन-गोष्ठिया-प्रदर्शन-पुस्तकें पत्रक वितरण तथा अनेक वक्ता प्रशिक्षिण वर्ग-संघ के द्वारा चीन के विषय पर एक पखवाड़े का आयोजन, विचार परिवार के अन्य संगठनों का सहयोग आदि का उल्लेख किया। स्वदेशी शब्द देश एवं विदेश में विभिन्न माध्यमों से अरबों-खरबों बार प्रयोग किया गया।

इस आयोजन की सफलता के लिए प्रमुख रूप से दो बिंदु बतायें- 1. स्वदेशी के मुद्दे में शक्ति, 2. स्वदेशी जागरण मंच की समस्त टीम पूरी शक्ति के साथ समरस होकर लगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान का विस्तार ही इसका अनुवर्तन है। देश को रोजगार प्रदान करने में वर्तमान तंत्र असफल हो रहा है। विकास का पैमाना रोजगार होना चाहिए।

आगामी कार्यक्रम- श्री कश्मीरी लाल ने निम्नलिखित आगामी कार्यक्रमों के बारे में बताया-
1. स्वदेशी महारैली के घोषणा-पत्र एवं प्रधानमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन को सभी प्रांत एवं जिलों में पत्रकार वार्ताएं आयोजित करके प्रचारित करना है। कार्यकर्ताओं की बैठक में इसका वाचन करना है।
2. राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी जयंती- 10 नवंबर को यह कार्यक्रम देश के प्रत्येक जिलें एवं प्रांत में आयोजित करना है। इसके अंतर्गत एक वक्ता ठेंगड़ी जी के जीवन पर तथा दूसरा वक्ता ठेंगड़ी जी के विचारों पर विषय प्रस्तुत करें।
3. बाबू गेनू बलिदान दिवस- 12 दिसंबर को यह कार्यक्रम प्रत्येक जिलें एवं प्रांत में स्वदेशी दिवस के रूप में आयोजित करना है।
4. चीनी प्रोजेक्टस जहां-जहां चल रहे हैं, उन्हें चिन्हित करके वहां धरना-प्रदर्शन आयोजित करने हैं। जो सिनेमा सितारे तथा खिलाड़ी चीन के विज्ञापन कर रहे हैं, उन्हें सोशल मीड़िया के द्वारा तथा अन्य माध्यमों से इस संबंध में अपने मन की बात से अवगत करायें।
5. दिसंबर तक अपने प्रांत की सभी जिलों में जिला ईकाईयों का गठन कर लेना है।
6. सभी प्रांत अपने प्रांत की आवश्कताओं के अनुसार मुद्दों को चिन्हित करके थिंक टैंक व एक्शन ग्रुप का गठन करें।
7. सभी जिलें एवं प्रांतों में स्वदेशी संकल्पित परिवार सम्मेलन आयोजित करने हैं। श्री के.महादैवय्या इस संबंध में विशेष दायित्व निर्वहन करेंगे।
8. दिनांक 10-13 दिसंबर को अर्जेटीना में हो रही विश्व व्यापार संगठन की 11वीं मंत्रीस्तरीय बैठक के विषयों की अधिकतम जानकारी जनता तक पहुंचायें।
9. दिनांक 9 नवंबर को नई दिल्ली में विश्व व्यापार संगठन से संबंधित विशेषज्ञों का गोलमेज सम्मेलन प्रांत 10 बजे से सायं 4.00 बजे तक आयोजित किया जायेगा।

अन्य- स्वदेशी महारैली के उपरांत स्वदेशी जागरण मंच सहित विभिन्न संगठनों के सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल स्वदेशी महारैली का प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एवं महारैली का घोषणा-पत्र सरकार को सौपने गया था। यह ज्ञापन रक्षामंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण, खेलमंत्री श्री विजय गोयल ने 15, सफदरजंग रोड़, नई दिल्ली स्थित रक्षामंत्री के आवास पर ग्रहण किया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अरूण सिंह भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय परिषद बैठक में इस ज्ञापन का वाचन डॉ. अश्वनी महाजन तथा घोषणा-पत्र का वाचन राष्ट्रीय संघर्ष वाहिनी प्रमुख श्री अन्नदा शंकर पाणीग्रही ने किया।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के संगठक श्री अजय उपाध्याय ने बताया कि स्वदेशी संकल्प रथयात्रा के दौरान लगभग 600 दुकानदारों ने चीनी मोबाईल कंपनियों के (ओपो व वीवो) बोर्ड स्वेच्छा से उतारें। स्वदेशी महारैली स्थल पर यह रथ कार्यकर्ताओं के आकर्षण तथा सेल्फी प्वाईंट के रूप में केंद्र बना हुआ था। श्री सरोज मित्र ने स्वदेशी महारैली को मंच के सामुहिक प्रयासों का परिणाम बताया। श्री कश्मीरी लाल ने केरल के सहप्रांत संयोजक श्री वर्गीज थोडू पेरंबिल को एक प्रतिष्ठित संस्था के द्वारा पुरस्कार दिये जाने की जानकारी भी सदस्यों को दी।

नई नियुक्तियां- मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरूण ओझा ने निम्नलिखित कार्यकर्ताओं को दायित्व प्रदान किये-
अखिल भारतीय दायित्व
1. श्री कृष्ण कुमार शर्मा - अखिल भारतीय सह संघर्षवाहिनी प्रमुख
2. श्री बलराम नंदवानी (सीए) - अखिल भारतीय सह विचार विभाग प्रमुख
क्षेत्रीय दायित्व
1. श्री विजय वत्स - उत्तर क्षेत्र संयोजक
2. श्री विनोद ऋषि - उत्तर क्षेत्र सहसंयोजक
3. डा. राजीव कुमार - सहक्षेत्र संयोजक (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड)
4. श्री अजय उपाध्याय - क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड)
5. श्री भोलानाथ मिश्र - क्षेत्र संपर्क प्रमुख (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड)
6. श्री सर्वेश पांडेय - सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड)
7. डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा - सह क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख (म.प्र., छत्तीसगढ़)
प्रांतीय दायित्व
1. श्री सतेन्द्र सरौत - प्रांत संयोजक, हरियाणा
2. श्री चन्द्रशेखर - प्रांत संयोजक, पंजाब
3. श्री अनिल लुहारी - प्रांत संयोजक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश
4. श्री एन.आर. मंजुनाथ - प्रांत संयोजक, कर्नाटक
5. श्री मनोज मिश्र - सह प्रांत संयोजक, अवध प्रांत
6. श्री आनंद श्रीवास्तव - सह प्रांत संयोजक, पूर्वी उत्तर प्रदेश
7. श्री नरसिम्हन राजू - सह प्रांत संयोजक, आंध्र प्रदेश
8. श्री चंद्रमोहन साहू - सह प्रांत संयोजक, मध्य प्रदेश
9. श्री हरीश बाबू - प्रांत कोष प्रमुख, तेलंगाना
10. श्री वीर गोपाल - प्रांत संघर्षवाहिनी प्रमुख, तेलंगाना
11. श्री बी.भारद्वाज - प्रांत युवा प्रमुख, तेलंगाना
12. श्री प्रदीप - प्रांत विचार विभाग प्रमुख, कर्नाटक
13. श्री प्रभास पाणीग्रही - सह प्रांत संपर्क प्रमुख, उड़ीसा
14. श्री रघुनाथ वेहरा - सह प्रांत प्रचार प्रमुख, उड़ीसा
केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य
1. डॉ. एस. लिंगामूर्ति, तेलंगाना, 2. प्रो. विजय कौल, दिल्ली,
राष्ट्रीय परिषद सदस्य
1. श्री श्रीनिवास, कर्नाटक, 2. डॉ. फूलचंद, दिल्ली, 3. श्री गिरीश नीलगुण्डा, कर्नाटक
स्वदेशी संकल्प परिवार सम्मेलन के लिए श्री के. महादैवय्या विशेष दायित्व निर्वहन करेंगे।

विशेषः राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान एवं स्वदेशी महारैली के संबंध में एक अंक तथा स्मारिका प्रकाशित की जायेगी। सभी कार्यकर्ता अपने अनुभव, विशेष प्रसंग (एक-डेढ़ पृष्ठ), चित्र आदि 10 दिनों के भीतर राष्ट्रीय संयोजक को भेज दें।

समारोपः देश भर के सभी कार्यकर्ताओं को स्वदेशी जागरण मंच-केंद्र की ओर से स्वदेशी महारैली की सफलता के लिए श्री अरूण ओझा ने आभार प्रकट किया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि स्वदेशी के कार्य का विस्तार ही स्वदेशी महारैली का अनुवर्तन प्रयास है। रैली के घोषणा पत्र, ज्ञापन, चित्र, अनुभव को समाज के सभी क्षेत्रों में ले जायें। ऐसे क्षेत्रों में भी ले जायें जहां तक अभी स्वदेशी जागरण मंच नहीं पहुंचा है। धीरे-धीरे एक नया स्वदेशी जागरण मंच गढ़ा जा रहा है। समाज एवं देश को स्वदेशी के विराट स्वरूप का दर्शन करवाते हुए हमें शीघ्र ही स्वदेशी जागरण मंच के एक नये स्वरूप के लिए तैयार रहना होगा। इसी के साथ राष्ट्रीय परिषद बैठक समाप्त हो गई।

स्वदेशी महारैली - घोषणा-पत्र Hindi English