राष्ट्रीय परिषद बैठक 21-22 मई 2016, भोपाल (म.प्र.)

राष्ट्रीय परिषद बैठक 21-22 मई 2016, भोपाल (म.प्र.) की कार्यवाही एवं लिए गए निर्णय

दिनांक 21 मई 2016 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के भोपाल स्थित कार्यालय के सभागार में मंच की राष्ट्रीय परिषद बैठक प्रातः 10.00 बजे प्रारंभ हुई। आंचलिक संघर्ष वाहिनी प्रमुख श्री वंदेशंकर सिंह (झारखंड) ने ‘‘आंधी क्या है - तूफान चले’’ गीत प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश के सह प्रांत संयोजक श्री अरूषेन्द्र शर्मा ने व्यवस्था संबंधी सूचनाएं प्रदान की। मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरूण ओझा, सह संयोजकगण प्रो. भगवती प्रकाश, श्री सरोज मित्र, प्रो. बी.एम.कुमारस्वामी, डॉ. अश्वनी महाजन, सीए आर. सुन्दरम्, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महामंत्री श्री जितेन्द्र गुप्त, वनवासी कल्याण आश्रम से श्री कृपा प्रसाद सिंह, श्री लक्ष्मी नारायण भाला ने भारत माता, राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगडी एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्रों के संमुख दीप प्रज्ज्वलन करके बैठक का उद्घाटन किया। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ ने बैठक का संचालन करते हुए देश भर से आए हुए प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

श्री अरूण ओझा ने कहा कि वर्ष 1999 में इसी ऐतिहासिक शहर भोपाल में मंच की राष्ट्रीय परिषद बैठक हुई थी। इसमें विश्व व्यापार संगठन के संबंध में भारत की भूमिका को लेकर नारा दिया गया था ‘‘मोड़ो-तोड़ो-छोड़ो’’। वर्ष 2016 में एक बार फिर यहां बैठक हो रही है। इतने वर्षों में मंच आगे तो बढ़ा है किंतु प्रगति संतोषजनक नहीं है। जिस तीव्रता से नए-नए आक्रमण हो रहे हैं हम उसी मात्रा में प्रतिकार नहीं कर पा रहे हैं। कहीं पानी पर धारा 144, कहीं जंगलों में आग, कहीं अति वृष्टि दिखाई दे रही है। सरकार की नीतियों में कुछ अंतर तो दिखाई दे रहा है। साथ ही साथ विकास की ललक के कारण देश के संसाधनों की भारी लूट का तंत्र खड़ा हो रहा है। वह हमें कहां ले जायेगा ? ‘‘इस प्रकार के विकास’’ से किस प्रकार वापस लौटा जाए? इस बारे में हम इस बैठक में विचार करेंगे।

प्रांतों के वृत्त निम्नलिखित कार्यकर्ताओं ने जोधपुर सम्मेलन के उपरांत अपने-अपने प्रांतों की गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। केरल-श्री एम.आर. रंजीत कार्तिकेयन (प्रांत संयोजक), तमिलनाडू-श्री एम. मुरलीधरन (प्रांत संयोजक), कर्नाटक-श्रीर एन.आर. मंजूनाथ (प्रांत सहसंयोजक), तेलंगाना-श्री लक्ष्मणाचार्य (प्रांत सहसंयोजक), आंध्र प्रदेश-श्री अन्नदा शंकर पाणीग्रही (अखिल भारतीय संघर्ष वाहिनी प्रमुख), महाराष्ट्र-श्री अमोल पुसद्कर (प्रांत संयोजक), श्री धनंज्य भिडे (राष्ट्रीय परिषद सदस्य), गुजरात-श्री रमेश दवे (प्रांत संयोजक), महाकौशल (म.प्र.)-श्री देवेन्द्र विश्वकर्मा (प्रांत सहसंयोजक), मध्य भारत (म.प्र.)-श्री अरूषेन्द्र शर्मा (प्रांत सहसंयोजक), मालवा (म.प्र.)-श्री सुरेश बिजोलिया (प्रांत सहसंयोजक), छत्तीसगढ़-श्री मोहन पंवार (प्रांत संयोजक), श्री नरेन्द्र ठाकुर (प्रांत सहसंयोजक), राजस्थान-श्री धर्मेन्द्र दुबे (प्रांत संयोजक), हरियाणा-श्री विजय वत्स (प्रांत संयोजक), दिल्ली-श्री सुशील पांचाल (प्रांत संयोजक), जम्मू कश्मीर-श्री कृष्ण कुमार शर्मा (क्षेत्र संयेजक), हिमाचल प्रदेश-श्र नरोत्तम ठाकुर (प्रांत संयोजक), पंजाब-श्री विनोद ऋषि (प्रांत संयोजक), प.उ.प्र.-डॉ. राजीव कुमार (प्रांत संयोजक), अवध-श्री भोलानाथ मिश्रा (प्रांत संयोजक), काशी-डॉ. शर्वेश पांडेय (प्रांत संयोजक), उत्तराखंड-श्री विपिन कुमार राणा (प्रांत सहसंयोजक), बिहार-श्री दिलीप निराला (प्रांत संयोजक), झारखंड-श्री राजेश उपाध्याय (प्रांत संयोजक), उड़ीसा-श्री निर्मल षडंगी (प्रांत संगठक), अरूणाचल प्रदेश-श्री कमलेश कुमार राय, महिला क्षेत्र-श्रीमति रेणु पुराणिक (अ.भा. महिला प्रमुख), लघु उद्योग भारती-श्री जीतेन्द्र गुप्त, वनवासी कल्याण आश्रम-श्री कृपा प्रसाद सिंह।

पारित प्रस्तावः
1. ई-कॉमर्स व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश वापिस हो- डॉ. अश्वनी महाजन ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया एवं डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा ने इसका समर्थन किया।
प्रस्ताव की भूमिका रखते हुए डॉ. अश्वनी महाजन ने कहा कि इस विषय पर यू.पी.ए. सरकार के समय स्वदेशी जागरण मंच सहित अनेक संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था। इसमें भारतीय जनता पार्टी ने घोषित रूप से पूरा समर्थन किया था एवं अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी इसका उल्लेख किया। किंतु सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार इसे ‘‘चोर दरवाजे’’ से ला रही है। इससे भारी बेरोजगारी बढ़ेगी तथा व्यापार पर विदेशी कंपनियों का कब्जा हो जायेगा।

2. सस्ती दवाओं व चिकित्सा सेवाओं से चिकित्सा की सर्वसुलभता आवश्यक- डॉ. भगवती प्रकाश ने यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया एवं डॉ. बी.एल. जागेटिया (प्रांत सहसंयोजक, राजस्थान), प्रो. राजकुमार मित्तल (उत्तर क्षेत्र सह विचार मंडल प्रमुख) एवं श्री अमोल पुसद्कर (प्रांत संयोजक, महाराष्ट्र) ने इसका समर्थन किया।
प्रस्ताव की भूमिका रखते हुए डॉ. भगवती प्रकाश ने कहा कि शहरी क्षेत्र की 70 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र की 63 प्रतिशत जनसंख्या प्राईवेट अस्पतालों में ईलाज करवाने के लिए मजबूर है। चिकित्सा अत्यंत मंहगी होती जा रही है जिसके कारण लोगों को या तो अपनी संपत्ति बेचनी पड़ती है या फिर भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। जिसके कारण प्रतिवर्ष कुल जनसंख्या के 2.2 प्रतिशत (2 करोड़ 70 लाख) लोग गरीबी रेखा से नीचे जा रहे हैं। अतः इलाज सस्ता एवं सुलभ होना चाहिए।

3. विकासः अस्तित्व के लिए - प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी ने इसका वाचन किया। श्री अरूण ओझा ने समर्थन किया।
प्रस्ताव की भूमिका रखते हुए प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी ने कहा कि विकास का पश्चिमी मॉडल लालच पर आधारित है। इसमें मनुष्य-जीव-वनस्पति-पर्यावरण रक्षा-जल-जमीन-जंगल आदि के बीच में कोई सामंजस्य ही नहीं दिखाई देता। विकास के नाम पर संसाधनों की लूट के लिए योजनाएं बनाई जा रही है। जिसके कारण मानवता का अस्तित्व ही संकट में पड़ रहा है।
प्रस्तावों की प्रति संलग्न है।

कार्य विभाग योजनाएं निम्नलिखित कार्यकर्ताओं ने प्रस्तुत की-
1. संपर्क विभाग-श्री लालजी भाई पटेल (अ.भा.संपर्क प्रमुख), 2. संघर्ष वाहिनी-श्री अन्नदा शंकर पाणीग्रही (अ.भा. संघर्ष वाहिनी प्रमुख), 3. कोष-श्री संजीव महेश्वरी सी.ए. (अ.भा. सह कोष प्रमुख), 4. प्रचार विभाग-डॉ. निरंजन सिंह (अ.भा. सह प्रचार प्र्रमुख)

विशेष व्याख्यानः वर्तमान आर्थिक परिदृश्य - प्रो. भगवती प्रकाश
कृषि : देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर जानकारी देते हुए प्रो. भगवती प्रकाश ने बताया कि ‘कृषि’ जिस पर देश की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या अपने रोजगार के लिए निर्भर है, उसकी 2015-16 में विकास दर 1.1 प्रतिशत रही है। यह अपने आप में इस क्षेत्र की दयनीय स्थिति को बताने के लिए पर्याप्त है।

उद्योग एवं व्यापारः उद्योगों की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि बैंकों ने उद्योगों को चलाने के लिए जो ऋण दिए है वे डूब (एनपीए) रहे हैं। ऐसा नहीं है कि देश के अधिकांश उद्योगपति बेइमान हो गए है बल्कि चीन से भारी मात्रा में माल आने के कारण अनेक क्षेत्रों में कारखाने बंद हो रहे है। वर्ष 2010-11 में सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्ज जहां 71000 करोड़ रूपये के थे वे बढ़कर 2015-16 में 3 लाख 60 हजार करोड़ रूपये के हो गये हैं। ऐसे संकेत आ रहे हैं कि मार्च 2017 तक यह राशि बढ़कर 5 लाख 50 हजार करोड़ हो जायेगी जोकि बैंकों के द्वारा दिए गए कुल कर्जां का 6.9 प्रतिशत है। वित्त मंत्रालय ने स्वयं बताया है कि केवल पंजाब नेशनल बैंक को ही इस वर्ष एक तिमाही में 5163 करोड़ का घाटा हुआ है एवं उसके फंसे हुए कर्जे 12 प्रतिशत हो गए हैं। यह घाटा भी तब हो रहा है जबकि बैंक SMS सहित अपनी प्रत्येक सेवा के लिए ग्राहकों से विभिन्न प्रकार के भारी शुल्क अथवा दण्ड वसूल रहे हैं।

निर्यातः वर्तमान सरकार ने 1 अप्रैल 2015 को यह लक्ष्य निश्चित किया था कि आगामी 5 वर्षों में निर्यात को दुगना कर लेंगे। वास्तविकता यह है कि पिछले 17 महीनों से लगातार निर्यात घट रहे हैं।

व्यापार घाटाः इस अवधि में आयात भी घटा है एवं तेल के दाम गिरे है जिसके फलस्वरूप हमारा व्यापार घाटा पिछले 5 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। यह लाभ हमें किसी नीतिगत प्रयास के कारण नहीं बल्कि सौभाग्यवश प्राप्त हुआ है।
विश्व के 29 देशों के साथ हमारा व्यापार घाटा है। किंतु चीन के साथ व्यापार घाटा चिंताजनक स्थिति में है। चीन से भारत 61.7 अरब डालर (4,15,056 करोड़ रूपये) का माल आयात करता है एवं चीन को 9.16 अरब डालर (61,619 करोड़ रूपये) का निर्यात करता है। इसमें भी ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन से तैयार माल आता है जबकि भारत से कच्चा माल (कच्ची रबड, लौह अयस्क आदि) जाता है। ऐसा अनुमान है कि चीन से अवैध रूप से आने वाले माल को भी जोड़ लें तो यह घाटा और अधिक बढ़ जायेगा। चीन के माल के कारण देश में एक परिवर्तन आ रहा है वह भी हमें समझना होगा। उदाहरण के लिए चीन से दो वर्ष पूर्व 40000 टायर आए थे जिनका आयात इस वर्ष बढ़कर 1,12,000 हो गया है। चीन बिना गारंटी वाला सस्ता टायर बना रहा है। उसका मुकाबला करने के लिए भारतीय उत्पादकों ने भी बिना गारंटी वाले टायर बनाना शुरू किया है। स्वाभाविक रूप से इसका असर ट्रकों सहित अन्य वाहनों की दुर्घटनाओं के रूप में देखने को मिलेगा। जिसका सीधा संबंध बीमा विवादों से भी होगा। इसका समाधान यह है कि तकनीकी गुणवत्ता को आधार बनाकर भारत चीन के माल को रोक दे। विश्व व्यापार संगठन के कानून इस बात की अनुमति देते हैं।

फरीदाबाद (हरियाणा) जैसे शहरों में शीशा उद्योग इसलिए समाप्त हो रहा है क्योंकि बल्ब का चीन से भारी मात्रा में आयात हो रहा है। चीनी मोबाईल के भारत में कुछ समय पूर्व 12 ब्रांड ही थे, जोकि अब बढ़कर 57 हो गये हैं। मोबाईल बाजार में चीन की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत बढ़कर कुल 24 प्रतिशत हो गई है।

आयात की इस समस्या से निपटने के लिए सरकार चीनी कंपनियों को ही एफ.डी.आई. के रूप में भारत आने को कह रही है। भविष्य में इस एफ.डी.आई. को रोल बेक करना असंभव हो जायेगा, क्योंकि ऐसी स्थिति में बाजार दर पर मुआवजा देना होता है। चीन के साथ भारत ने 16 समझौते ऐेसे किये हैं जिनसे केवल चीन को ही लाभ पहुंच रहा है।

भारत के उद्योगपतियों ने पिछले 15 वर्षों में अपनी 20,000 करोड़ रूपये की पूंजी लगाकर सौर ऊर्जा उपकरण बनाने के उद्योग खड़े किये थे तथा अपना 70 प्रतिशत माल यूरोपीय देशों को निर्यात भी करते थे। चीन के उपकरण आने से उनके कारखाने बंद हो रहे है। वह भी उस स्थिति में जबकि भारत सौर उर्जा में स्वयं लंबी छलांग लगाने जा रहा है। भारत सरकार को चाहिए कि चीन से आने वाले सौर उर्जा उपकरणों पर एंटी डम्पिंग डयूटी (एक विशेष प्रकार का आयात टैक्स) लगाये। विश्व व्यापार संगठन का कानून इसकी अनुमति देता है। इससे जहां एक और हमारे छोटे-छोटे कारखाने बच जायेंगे। वहीं दूसरी ओर सरकार को भी इस आयात टैक्स की भारी आमदनी होगी। सरकार को चाहिए कि भारत में लगने वाले बड़े सोलर पार्कों के ठेके चीनी कंपनियों को देना बंद करें। ये कंपनियां भारत में पैदा बिजली भारत को ही बेचकर दशकों तक भारी मुनाफा अपने देश ले जाती रहेंगी। उदाहरण के लिए सूचना क्रांति के 1G (C Dot) में भारत आगे था किंतु सरकारी नीतियों के कारण 2G, 3G, 4G में विदेशी कंपनियां बाजी मार गई। कहीं ऐसा न हो कि तरक्की का उभरता हुआ सौर उर्जा क्षेत्र इसी तरह हमारे हाथ से निकल जाए।

वैज्ञानिक खोज एवं शोधः पिछले वर्ष कोरिया ने 14000, चीन ने 29000, अमरीका ने 57000 पेटेंट प्राप्त किए, वहीं भारत ने 1433 पेटेंट प्राप्त किए। अन्य देशों ने औसत 6 से 7 हजार ट्रेड मार्क हेतु आवेदन किए है तो भारत ने 150 किए है (पिछले वर्ष 153 किए थे।)। नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 1947 से लेकर 2015 तक मात्र 14 पेटेंट ही प्राप्त किए हैं, जबकि चीन इस क्षेत्र में 705 पेटेंट प्राप्त कर चुका है। कहने का तात्पर्य यह है कि भारत 2013 तक शोध एवं अनुसंधान पर अपने जीडीपी का मात्र 0.85 प्रतिशत ही खर्च कर रहा था, हमें इसमें अपना खर्च बढ़ाना होगा। लेकिन प्रश्न यह है कि इसके लिए पैसा कहां से आयेगा। एक तरफ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ाने की बात कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ विदेशों से आने वाले माल पर टैक्स भी घटा रही है, जिससे उसकी आमदनी कम हो रही है। उदाहरण के लिए 1990 में आयात कर से आमदनी जीडीपी का 9.8 प्रतिशत थी जोकि आज घटकर 3.8 प्रतिशत ही रह गई है। वहीं दूसरी ओर देश की जनता पर टैक्स बढ़ा है। इसी कमी की भरपाई के लिए अपने देश की जनता पर 1995 में पहली बार सेवाओं पर सर्विस टैक्स लगाया गया था, जो कि सभी सेवाओं पर आज 15 प्रतिशत का विकराल रूप ले चुका है। आयात कर से आमदनी घटने के कारण ही सरकार ने स्कूल एवं अस्पतालों पर खर्च कम कर दिया फलस्वरूप प्राईवेट स्कूलों एवं अस्पतालों की बाढ़ सी आ गई है। देश के 60 प्रतिशत बच्चे प्राईवेट स्कूल में एवं 50 प्रतिशत बच्चे प्राईवेट कॉलेजों/उच्च शिक्षण संस्थानों में भारी फीस देकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है। शहरी क्षेत्रों के 70 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्रों के 63 प्रतिशत नागरिक भारी फीस देकर प्राईवेट अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। सड़कों के निर्माण से भी सरकारों ने हाथ खींच लिया है। नागरिकों से नए वाहन की खरीद पर 10 वर्षों का एक मुश्त रोड़ टैक्स वसूल लिया जाता है। किन्तु इसके बावजूद भी सड़कों के निर्माण का काम टोल कंपनियों से करवाया जा रहा है। ये कंपनियां जहां एक ओर प्रत्येक 50-60 किमी. के बाद नागरिकों को लूटती हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों के किनारे स्थित ढ़ाबा/रेस्टोरेंट उद्योग पर भी योजनापूर्वक कब्जा कर रही है।
सरकार को चाहिए कि कृषि व अन्य क्षेत्रों में शोध, अनुसंधान को बढ़ावा दे। भारत में 60 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा आधारित है एवं दलहन-तिलहन की फसलें ऐसी भूमि पर ही अच्छी होती है। दालों एवं खाद्य तेलों के आयात पर हर वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रूपये बाहर चले जाते है, इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।

IPR श्री कश्मीरी लाल ने कहा कि भारत में कुल 22000 दवा कारखाने काम कर रहे हैं जो कि दुनिया के 35 प्रतिशत गरीबों को सस्ती दवाईयां मुहैया करा रहे हैं। ये कारखाने दुनिया के कुल दवा उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा उत्पादन करते हैं जिसके कारण भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है। अमरीका की इसी पर नजर है।

देश में लागू की गई नई आई.पी.आर. नीति के संबंध में चर्चा प्रारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का आई.पी.आर. कानून विश्व व्यापार संगठन के अनुरूप है। किन्तु अमरीका का यह कहना रहा है कि खोज तो वे करते हैं लेकिन भारत की आई.पी.आर. नीति की वजह से कमाई भारत करता है। इसी कारण अमरीका ने अपने कानून की धारा Special 301 के अंतर्गत भारत को निगरानी सूची में डाल दिया था। उनकी ओर से लगातार यह दबाव बनाया जा रहा था कि भारत अपनी आई.पी.आर. नीति को बदले। 14 मई 2016 को सरकार ने नीति बदलने की घोषणा भी की। इस नीति को सरसरी नजर में देखने पर लगता है कि सरकार ने वही बातें दोहराई हैं जो स्वदेशी जागरण मंच लंबे समय से कहता रहा है। यह भी कहा गया है कि देश के 4 पेटेंट कार्यालयों में 2,35,000 पेटेंट की अर्जियां लंबित पड़ी हैं, उन्हें शीघ्र निपटाने के प्रावधान इस नीति में किए गए है। इससे नए शोध को बढ़ावा मिलेगा। इस नीति में जेनेरिक दवाओं का कहीं उल्लेख ही नही है एवं फार्मा उद्योग की वर्तमान कठिनाईयों की चर्चा भी नहीं की गई है अपितु भविष्य की योजना के बारे में बताया गया है। सरकारी बयान में एक शब्द प्रयोग किया गया है कि ‘‘हमें संतुलित रवैया रखना होगा’’। इसका क्या अर्थ है? प्रधानमंत्री 7 जून को अमरीका दौरे पर जा रहे हैं। इस बात पर सावधानी बरतनी होगी कि ‘‘संतुलित रवैया’’ की आड़ में भारत अमरीका के दबाव में न आए।

चर्चा में भाग लेते हुए प्रो. भगवती प्रकाश ने कहा कि अमरीका सहित अनेक देशों की कमाई का मुख्य साधन आई.पी.आर. ही है। आई.पी.आर. के 7 हिस्सों में से एक हिस्सा ‘‘कापी राईट’’ का है। मात्र इसी से अमरीका को 1.4 ट्रिलियन डालर (9,56,000 करोड़ रूपये) की आय हो रही है जो कि उसके कुल जीडीपी का 7 प्रतिशत है। हालांकि भारत सरकार ने अभी केवल नीति ही बनाई है, कानून नहीं। किंतु भविष्य में कानून बनाने का आधार नीति को ही बनाया जाता है।

भारत को आई.पी.आर. को Global convention on Bio Diversity के साथ जोड़ने की मांग उठानी चाहिए। इस पर 117 देशों ने सहमति व्यक्त की थी। साथ ही साथ यह मांग भी करनी चाहिए कि यदि कोई कंपनी आधी या चौथाई कीमत पर दवाई बनाकर बेचने को तैयार हो तो उसे Automatic Compulsory Licence प्राप्त हो जाना चाहिए।

चर्चा में श्री जगमोहन सिहं (अमृतसर), श्री श्याम सिंह ठाकुर, डा. अश्वनी महाजन ने भाग लिया। चर्चा का समारोप करते हुए श्री कश्मीरी लाल ने कहा कि इस संबंध में सभी गतिविधियां पर नजर रखते हुए अपनी जानकारियों को और अधिक बढ़ाना होगा। सामान्यत जिन चीजों के बारे में सरकारें जोर-शोर से कहती हैं कि चिंता की कोई बात नहीं है, वास्तव में सबसे अधिक चिंता उन्हीं बातों से होती है। इस संबंध में एक Documentary भी I-cloud पर उपलब्ध है। Fire in the Blood नाम की इस Documentary को वर्ष 2013 में सर्वश्रेष्ठ का पुरस्कार भी मिला है। इस संबंध में सुश्री संगीता गोडबोले (वर्तमान आई.आर.एस. अधिकारी) गंभीरता से कार्य कर रही हैं। श्री सतीश कुमार उनके संपर्क में हैं। कोई भी जानकारी उन्हें satishk1925@gmail.com एवं फोन (9915714309, 9530991925) पर दें।

स्वदेशी एजेंडाः नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति एवं मंच के पूर्व राष्ट्रीय सहसंयेजक श्री योगानंद काले ने कहा ‘राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगडी की एक सोच थी। वे कहते थे कि ये LPG (Liberalisation Privatisation Globalisation) दुनिया को कहां ले जायेगा। दुनिया को तब ये बताया गया कि LPG का अर्थ है कि देशों की सीमाओं को तोड़कर विश्व के सभी देशों में ‘पूंजी’ एवं ‘प्रौद्योगिकी’ निबार्ध रूप से आवागमन करेगी। विश्व ‘एक बजार’ बन जायेगा, जहां कोई भी अपना माल बेच सकेगा। यह भी कहा गया था कि सभी देशों की अर्थव्यवस्था के लिए TINA (There is no alternative) कोई अन्य रास्ता ही नहीं है। श्री काले ने शुभाकर कॉलेज में कुछ वर्ष पूर्व हुए एक सेमीनार का उल्लेख किया। इसमें कहा गया था कि दुनिया को TINA से TAMA (There are many Alternatives) की ओर जाना होगा।

पश्चिम का मॉडल दुनिया को एक बाजार मानता है। बाजार का आधार ‘शोषण’ होता है। भारत वसुधैव कुटुम्बकम के कारण दुनिया को परिवार मानता है। परिवार का आधार ‘पोषण’ होता है। बाजार किसी व्यक्ति को आर्थिक ईकाई मानता है जबकि पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने व्यक्ति को समग्रता में देखने की दृष्टि दी है। पूरी दुनिया को लगने लगा है कि पश्चिम के इस बाजार वादी मॉडल को बदलना होगा। स्वदेशी जागरण मंच की यह जिम्मेदारी है कि वह रास्ता दिखाये। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास का जो नारा दिया है - इस विमर्श में सम्मिलित हों।

सौर ऊर्जाः श्री सतीश कुमार (अखिल भारतीय सह विचार मंडल प्रमुख एवं उत्तर क्षेत्र, राजस्थान, म.प्र. के संगठक) ने सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में काम करने के लिए बनाये गये BSDF की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सौर उर्जा उत्पादन जो कि 3.3 गीगावाट था वह पिछले 2 वर्षों में बढ़कर 9.5 गीगावाट हो गया है। किंतु चिंता इस बात से है कि सारे उपकरण विदेशों से आयात हो रहे है व सोलर पार्कों के ठेके विदेशी कंपनियों को दिए जा रहे है। सरकार को चाहिए के इसे सड़क राजमार्ग की तरह Basic Inds मानकर देश के छोटे उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करे व चीन से आने वाले उपकरणों पर एंटी डंपिंग डयूटी लगाये। इस हेतु मंच के कार्यकर्ता जहां एक तरफ उद्योगपतियों व जनता में जन जागरण करें वहीं स्थानीय स्तर पर अफसरों/जिलाधीशों से Policy Intervention करें एवं सुझाव दें। इसके लिए मंच के दिल्ली स्थित कार्यालय में दिनांक 8 अप्रैल 2014 को ठैक्थ् के कार्यालय का उद्घाटन श्री अरूण ओझा व श्री कश्मीरी लाल के करकमलों से किया गया। भारत में 762 गीगावाट उत्पादन करने की क्षमता उपलब्ध है।

श्री अरूण ओझा ने कहा कि इस हेतु सभी प्रांत टोलियों का गठन करें।

जैव संवृद्धित फसलेंः इस संबंध में डॉ. अश्वनी महाजन ने प्रगति से अवगत करवाते हुए कहा कि मोनसेंटो ने बी.टी. कपास के बीजों का उत्पादन करने के लिए कुछ भारतीय कंपनियों को लाईसेंस दे रखा था जिसके बदले वह उनसे रायल्टी वसूलती थी। मोनसेंटो ने उन कंपनियों का लाईसेंस किन्ही कारणों से रद्द कर दिया। उन कंपनियों ने कृषि मंत्रालय को मोनसेंटो द्वारा की जा रही धांधलियों से अवगत करवाते हुए शिकायत की। कृषि मंत्रालय ने कार्यवाही करते हुए आदेश जारी करते हुए कहा कि इन कंपनियों का लाईसेंस जारी करना होगा तथा वह 10 प्रतिशत से अधिक रायल्टी नहीं वसूल सकती। मोनसेंटो कंपनी जब CCI (Competition Commission of India) शिकायत लेकर गई तो CCI ने कहा कि संपूर्ण मामले की जांच करेगा। इस पर मोंनसेंटो ने भारत छोड़कर जाने की धमकी दी। स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि मोनसेंटो को धांधलियों के कारण जनता व देश को जो हानि हुई है पहले वह उसका मुआवजा दे। अब यह कंपनी देश के ‘शीर्षस्थ’ नेताओं को लाबिंग के जरिये प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। मंच को देश में ऐसा वातावरण बनाना होगा जिससे कि वह अपने इस प्रयास में सफल न हो सके।

राष्ट्रीय विचार वर्ग-
पूर्वी क्षेत्र - 13,14,15 अगस्त 2016, बलांगीर (उड़ीसा), प्रतिभागी संख्या- बिहार-30, झारखंड-40, उड़ीसा-70, असम-5, सिक्किम-5, अरूणाचल प्रदेश-2, कुल संख्या-152 प्रतिनिधि

पश्चिमी क्षेत्र - 22,23,24 जुलाई 2016, इंदौर (म.प्र.)। प्रतिभागी संख्याः महाराष्ट्र-20, गुजरात-22, म.प्र.-75, छत्तीसगढ़-15, कुल संख्या-132 प्रतिनिधि।

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड क्षेत्रः 24,25,26 जून 2016, इलाहाबाद (उ.प्र.)। प्रतिभागी संख्याः प.उ.प्र.-40, अवध-30, काशी-70, उत्तराखंड-5, कुल संख्या-145 प्रतिनिधि।

उत्तर क्षेत्र- 10,11,12 जून 2016, पलवल (हरियाणा)। प्रतिभागी संख्याः जम्मू कश्मीर-5, हि.प्र.-25, पंजाब-25, हरियाणा-60, दिल्ली-75, राजस्थान-50। कुल संख्या-240 प्रतिनिधि।

दक्षिण क्षेत्र - तिथियों की सूचना शीघ्र भेजी जायेगी।
विचार वर्ग का प्रतिनिधि शुल्क रू. 250/- है।

राष्ट्रीय सभा - 12,13,14 नवंबर 2016, गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरूक्षेत्र (हरियाणा)। दिनांक 11 नवंबर को दोपहर 3.00 बजे राष्ट्रीय परिषद की बैठक इसी स्थान पर होगी। प्रतिभागी संख्याः केरल-10, तमिलनाडू-25 पुरूष 5 महिलाएं, कनार्टक-30 पु. 4 म., तेलंगाना-15 पु. 5 म., आंध्र प्रदेश-15 पु. 5 म., महाराष्ट्र-15 पु. 5 म., गुजरात-25 पु. 5 म., महाकौशल (म.प्र.)-35 पु. 10 म., मालवा (म.प्र.)-25 पु. 5 म., मध्य भारत-25पु. 10म., छत्तीसगढ़-15 पु. 5 म., राजस्थान-50 पु. 10 म., जम्मू कश्मीर-10पु., हि.प्र.-50 पु. 30 म., पंजाब-23 पु., 2 म., हरियाणा-70 पु. 10 म., दिल्ली-70 पु. 20 म., प.उ.प्र.-40 पु. 5 म., अवध-35 पु. 15 म., काशी-65 पु. 5 म., उत्तराखंड-25 पु. 5 म., बिहार-55 पु. 10 म., झारखंड-45 पु. 5 म., उडीसा-50 पु. 10 म., बंगाल-20 पु. 5 म., उत्तर पूर्व राज्य-10, कुल संख्या-853 पुरूष व 192 महिलाएंत्र1045 प्रतिनिधि।
प्रतिनिधि शुल्क- रू.300/- प्रति व्यक्ति।

पात्रता- राष्ट्रीय सभा में प्रांतीय परिषद के सदस्य एवं इससे उपर के स्तर के कार्यकर्ता अपेक्षित है। प्रांतीय परिषद से तात्पर्य यह है कि सभी नगर, जिला, विभाग एवं ऊपर स्तर के संयोजक/सह संयोजक/संगठक तथा समविचारी संगठनों के 2-2 प्रतिनिधि। सभी प्रांत अपने जिले/प्रांत का बैनर झंडे साथ लेकर आएं।

संगठनात्मकः श्री कश्मीरी लाल ने विभिन्न प्रांतों में संगठनात्मक ढांचा सुदृढ़ करने के सुझाव दिये। देशी विदेशी वस्तुओं की सूची, अधिकाधिक सदस्य बनाने, जिला/प्रांत विचार वर्ग आदि के विषय में चर्चा की।

अन्य : बैठक में स्वदेशी जागरण मंच के प्रथम राष्ट्रीय संगठक एवं राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगडी के अनन्य सहयोगी श्री रामदास पांडे (भारतीय मजदूर संघ), मध्य प्रदेश से पूर्व राज्यसभा सांसद श्री रघुनन्दन शर्मा, भारतीय मजदूर संघ (म.प्र.) के पूर्व प्रदेश महामंत्री श्री सुल्तान सिंह का परिचय श्री अरूण ओझा ने कराया। श्रीमति राजलक्ष्मी (तमिलनाडू) ने स्वदेशी परंपराओं/खेलों के विषय में, मुक्त व्यापार समझौते के विषय पर श्री आर.सुन्दरम् ने विस्तार से जानकारी दी। मध्य प्रदेश स्वदेशी जागरण मंच की ईकाई ने स्मारिका का विमोचन किया एवं मंचासीन सभी प्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न भेंट किया। श्री अरूण ओझा ने व्यवस्था के सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया।

नई नियुक्तियांः निम्नलिखित कार्यकर्ताओं को नए दायित्व प्रदान किए -
क्षेत्रीय दायित्व- श्री रमेश दवे (गुजरात, महाराष्ट्र प्रांतों के सह क्षेत्र संयोजक),
प्रांतीय दायित्व - गुजरात-श्री धीरेन्द्र भाई जेठवा (प्रांत संयोजक), श्री हसमुख भाई ठाकर (प्रांत सहसंयोजक), श्री अश्विन भाई सोनी (प्रांत सहसंयोजक),
तमिलनाडू- श्रीमति राजलक्ष्मी (प्रांत सहसंयोजक),
कर्नाटक- श्री विजय कृष्ण (प्रांत सहविचार मंडल प्रमुख),
राष्ट्रीय परिषद सदस्य - श्री नीलेश भाई परमार (गुजरात), श्री प्रभास पाणीग्रही (उड़ीसा)

आगामी कार्यक्रम/योजनाएं
1. बारहवीं राष्ट्रीय सभा - 12,13,14 नवंबर 2016, कुरूक्षेत्र (हरियाणा), दिनांक 11 नवंबर को दोपहर 3.00 बजे इसी स्थान पर रा.प. बैठक होगी।
2. केंद्रीय कार्यसमिति बैठक - 3,4 सितंबर 2016, नई दिल्ली
3. राष्ट्रीय विचार वर्ग - पत्रक में तिथियां व स्थान का उल्लेख किया गया है।
4. बुद्धिजीवी सम्मेलन- दिल्ली के प्रतिष्ठित Delhi School of Economics एवं JNU सहित देश के 55 विश्वविद्यालयों में एक वर्ष में मंच के कार्यक्रम हुए हैं। इनमें से बुद्धिजीवियों को चिन्हित करके उनके नाम/पता दिल्ली में प्रो. राजकुमार मित्तल (उत्तर क्षेत्र सह विचार मंडल प्रमुख) को ईमेल (dr123mittal@yahoo.com)/फोन (08586888937) पर शीघ्र भेजें। जुलाई माह में ऐसे बुद्धिजीवियों का राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जायेगा।
5. संघर्ष वाहिनी बैठक - दिनांक 27,28 अगस्त 2016, तुलसी भवन, बिष्टुपुर, जमशेदपुर (झारखंड), यह बैठक दिनांक 27 अगस्त को प्रातः 10 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त की देपहर 1.00 बजे तक चलेगी। इसमें सभी जिला/विभाग/नगर/प्रांत के संघर्ष वाहिनी प्रमुख अपेक्षित है। ऐसे कार्यकर्ता जिनको भविष्य में दायित्व दिया जा सकता है, वे भी अपेक्षित है। शुल्क-100 रू. प्रति व्यक्ति, संपर्क सूत्र- श्री बंदेशकर सिंह-आंचलिक संघर्ष वाहिनी प्रमुख (09431179660, 08987517941, इंदकमरेत/हउंपसण्बवउ)
6. चीन विरोधी अभियान- दीपावली से पूर्व एक सप्ताह तक चीनी वस्तुओं के विरोध में जन जागरण। रक्षा बंधन के अवसर पर भी जन जागरण करना है। जिलाधिकारियों को ज्ञापन भी देना है।
7. परिवार सम्मेलन- प्रखंड/नगर/जिला/विभाग/प्रांत स्तर की सभी ईकाईयो ने परिवार सम्मेलन आयोजित करने है।
8. स्वदेशी सप्ताह- 25 सिंतबर से 2 अक्टूबर तक स्वदेशी सप्ताह मनाना है। इससे पूर्व जिला/प्रखड/नगर/विभाग/प्रांत की ईकाईयों ने शिक्षक सम्मेलन करने हैं। इसका स्वाभाविक लाभ स्वदेशी सप्ताह की गतिविधियों में प्राप्त होगा। (स्वदेशीः क्या-क्यूं, कैसा को कार्यक्रमों का आधार बनाएं।)
9. नई इकाईयां का गठन- प्रत्येक स्तर की ईकाई ने प्रयासपूर्वक नई इकाईयां खड़ी करनी है।
10. एफ.डी.आई. के मुद्दे पर सभी वर्गों में जन जागरण। यह संभव है कि राष्ट्रीय सभा में इस पर कोई देश व्यापी अभियान/जनमत संग्रह का निर्णय लिया जाए। अतः जन जागरण का कार्य पूरा करके ही राष्ट्रीय सभा में आएं। इस हेतु पदयात्राएं/पत्रक वितरण/मोटरसाईकल यात्रा व अन्य कार्यक्रम करें।
11. सौर उर्जा के विषय पर सभी प्रांतों ने कार्यक्रम करने हैं।
12. कृषि के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कार्यक्रम करने है।
13. बाबू गेनू बलिदान दिवस (इस अवसर पर दैनन्दिन जीवन में स्वदेशी को आधार बनाकर कार्यक्रम करने है।)
14. आई.पी.आर. से जुड़े योग्य बुद्धिजीवियों को चिन्हित करके उनकी जानकारी श्री सतीश कुमार को देनी है।

समारोप : श्री अरूण ओझा ने कहा कि दिनांक 2,3,4 सितंबर 1993 को मंच का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। उस समय ठेंगडी जी ने कहा था कि स्वदेशी जागरण मंच का अपना कोई संगठन नहीं है। यह विभिन्न संगठनों का साझा मंच है। आज देखने में आ रहा है कि स्वदेशी जागरण मंच का अपना संगठन बढ़ रहा है। देश के अधिकांश जिलों से 1040 संयोजक/सहसंयोजक/संगठक स्तर के कार्यकर्ता कुरूक्षेत्र सभा में आ रहे हैं। किंतु हम संतुष्ट नहीं है। क्योंकि समस्याएं भी रोग-अपसंस्कृति-बेरोजगारी के रूप में बढ़ रही हैं। अतः सभी कार्यकर्ताओं को अपनी क्षमता शीघ्रता से बढ़ानी होगी। हम सभी दिए गए कार्यक्रमों पर पूरी शक्ति से काम करते हुए कुरूक्षेत्र की राष्ट्रीय सभा में पुनः एकत्रित होंगे। इसी आह्वान के साथ राष्ट्रीय परिषद बैठक संपन्न हो गई।

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