13वीं राष्ट्रीय सभा 12-14 नवंबर 2016, कुरूक्षेत्र (हरियाणा)

13वीं राष्ट्रीय सभा 12-14 नवंबर 2016, कुरूक्षेत्र (हरियाणा) की कार्यवाही एवं लिए गए निर्णय

मान्यवर,

दिनांक 12 नवंबर 2016 को गीता निकेतन विद्यालय के सभागार में मंच की 13वीं राष्ट्रीय सभा का शुभारंभ हुआ। मंच पर पं. दीनदयाल उपाध्याय, महात्मा गांधी, राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी एवं भारत माता के चित्र सुशोभित थे। राष्ट्रीय संयोजक श्री अरूण ओझा, राष्ट्रीय संगठक श्री कश्मीरी लाल, राष्ट्रीय सहसंयोजक प्रो. भगवती प्रकाश, श्री सरोज मित्र, प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी, डॉ. अश्वनी महाजन, श्री आर. सुन्दरम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री अनिरूद्ध देशपांडे, भारतीय मजदूर संघ के संगठनमंत्री श्री के.सी. मिश्रा, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री रमाकांत भारद्वाज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री देवव्रत आचार्य, अमेरिका से पधारे श्री अरविंद कुमार के कर कमलों से दीप प्रज्ज्वलन के द्वारा सभा का उदघाटन हुआ। मंच संचालन हरियाणा प्रांत संयोजक श्री विजय वत्स एवं उत्तर क्षेत्र सहसंयोजक श्री बलराम नंदवानी ने किया। मंच पर कुरूक्षेत्र विश्व विद्यालय के कुलपति श्री के.सी. शर्मा, डी.आर.डी.ओ. के वैज्ञानिक पदम्श्री डॉ. सतीश कुमार उपस्थित थे। सभागार में देश के सभी प्रांतों से आए हुए 695 प्रतिनिधियों सहित हरियाणा के मंत्रीगण श्री नायब सिंह सैनी, श्री कर्णदेव कम्बोज सहित विभिन्न सांसद/विधायकगण भी उपस्थित थे।

उत्तर क्षेत्र, मध्य प्रदेश व राजस्थान के संगठक श्री सतीश कुमार ने प्रस्तावना प्रस्तुत की एवं स्वामी ज्ञानानंद जी ने आशीर्वचन दिया। श्री देवव्रत आचार्य ने सभा को संबोधित किया। श्री अनिरूद्ध देशपांडे ने अपने भाषण में कहा कि शिक्षा क्षेत्र में एफडीआई मैकाले की याद कराती है। प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा में नहीं होगी तो गीता का परिचय कैसे प्राप्त होगा। देश समस्याओं के जाल में फंसता चला जा रहा है। अभी तो आई.पी.आर. एवं जी.एम. पर आक्रमण कर रहें हैं फिर चिंतन पर भी आक्रमण करेंगे। स्वदेशी के चिंतन से ही विश्व का कल्याण होगा। यह बताना ही स्वदेशी जागरण मंच का काम है। इसके लिए आंदोलन को चाहे जितना आगे बढ़ाना पडे, उसमें कोई संकोच नहीं करना है।

श्री अरूण ओझा ने वर्ष भर में की गई गतिविधियों का वृत सभा के सामने प्रस्तुत किया। इसी के साथ ही उद्घाटन सत्र संपन्न हो गया।

स्वदेशी संदेश यात्रा एवं जनसभाः दिनांक 12 नवंबर को कुरूक्षेत्र के मार्गों में भव्य संदेश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा सेक्टर-17 में जाकर विशाल जनसभा में परिवर्तित हो गई। सभा में दूरदराज के गांवों से हजारों की संख्या में किसान व अन्य नागरिक पहले से ही उपस्थित थे। सभा को डॉ. वंदना शिवा ने जीएम फसलों के विषय पर, हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष श्री कंवरपाल सिंह गुर्जर, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, श्री के.सी. मिश्रा ने संबोधित किया। श्री कश्मीरी लाल ने चीनी माल के बहिष्कार का आह्वान करते हुए अनेक तथ्य प्रस्तुत किए। ठंड एवं रात्रि हो जाने के बावजूद भी दूर-दराज के गांवों से आए हुए उपस्थित जनसमूह ने सभी वक्तओं को धैर्य एवं रूचिपूर्वक सुना।

विशेष व्याख्यानः सभा में निम्नलिखित विषयों पर व्याख्यान दिए गए -
1. भूमंडलीकरण के 25 वर्षः प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा
2. जी.एम. फसलेंः डॉ. अश्वनी महाजन
3. चीन से चुनौतीः श्री सतीश कुमार

पारित प्रस्तावः 1. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति निरस्त कर श्वेत पत्र जारी हो - डॉ. अश्वनी महाजन ने अंग्रेजी व श्री मनोज कुमार सिंह ने हिन्दी में वाचन किया।
2. रोजगार सृजन हो नीति का आधार - श्री अजेय भारती ने अंग्रेजी व श्री धर्मेन्द्र दुबे ने हिन्दी में वाचन किया।
3. सौर उर्जा उत्पादन में स्वदेशी उद्योगों का हो सशक्तिकरण - प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी ने अंग्रेजी व श्री भोलानाथ मिश्र ने हिन्दी में वाचन किया।

राष्ट्रीय संयोजक का वक्तव्यः उच्च मूल्य के नोटों को विमुद्रीकरण (नोटबंदी) पर स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक के वक्तव्य का वाचन प्रो. भगवती प्रकाश ने किया।

विशेष वृत्तः देश में संपन्न किए गए कुछ कार्यक्रमों का विशेष वृ़त्त निम्नलिखित महानुभावों ने प्रस्तुत किया -
1. राष्ट्रीय विचार वर्ग (पूर्व) - श्री बन्देशंकर सिंह
2. राष्ट्रीय विचार वर्ग (पश्चिम) - श्री अजय पत्की
3. राष्ट्रीय विचार वर्ग (उत्तर) - प्रो. राजकुमार मित्तल
4. राष्ट्रीय विचार वर्ग (उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) - श्री अजय उपाध्याय (काशी प्रांत संगठक)
5. विचार मंडल राष्ट्रीय बैठक, नागपूर - श्री अजय पत्की
6. संघर्ष वाहिनी राष्ट्रीय सम्मेलन - श्री अन्नदाशंकर पाणीग्रही
7. मुंबई में प्रो. आर.वैद्यनाथन (आईआईएम बैंगलूरू) व्याख्यान कार्यक्रम - श्री अजय पत्की

कार्य विभागशः बैठकें - निम्नलिखित कार्य विभागों की बैठकों में गतिविधियों की विस्तार से चर्चा की गई।
1. संयोजक : श्री अरूण ओझा
2. संगठक : श्री कश्मीरी लाल
3. विचार मंडल : श्री अजय पत्की/श्री अजेय भारती
4. संघर्ष वाहिनी : श्री अन्नदा शंकर पाणीग्रही/श्री बन्देशंकर सिंह
5. प्रचार एवं कार्यालय : श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’/श्री निरंजन सिंह (अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख)
6. संपर्क व कोष : श्री लाल जी भाई पटेल (अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख)/श्री रणजीत सिंह (अखिल भारतीय सहसंपर्क प्रमुख)
7. महिलाः श्री सरोज मित्र/श्रीमति रेणु पुराणिक (अखिल भारतीय महिला प्रमुख)

प्रांतशः बैठकें - सभी प्रातों ने अपने-अपने प्रांत की बैठकों में विभिन्न विषयों व आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। प्रांत के विषयों के अलावा बैठक में स्वदेशी पत्रिका सदस्यता, स्वदेशी मेला एवं लघु ऋण वितरण योजनाओं पर भी चर्चा की गई। प्रत्येक प्रांत बैठक में विभिन्न केंद्रीय पदाधिकारी उपस्थित रहें।

समानान्तर सत्र - 1. देशी चिकित्सा - श्री अरूण ओझा, श्री कृष्ण जटियान
2. वैश्विक आर्थिक परिदृश्य व एफ.डी.आई. - श्री अरविंद कुमार, डॉ. आशुतोष
3. जी.एम. फसलें एवं जैविक खेती - डॉ. अश्वनी महाजन व श्री अन्नदाशंकर पाणीग्रही
4. बौद्धिक संपदा अधिकार - प्रो. बी.एम.कुमारस्वामी, श्री आर.सुन्दरम व श्री अजेय भारती (अ.भा. सहविचार मंडल प्रमुख)

मुक्त चिंतन - दिनांक 13 नवंबर को सायंकाल सभी प्रतिनिधियों के लिए मुक्त चिंतन का सत्र रहा, जिसका संचालन श्री अन्नदाशंकर पाणीग्रही ने किया।

सत्रों की अध्यक्षता एवं संचालन : विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता व सत्र संचालन निम्नलिखित कार्यकर्ताओं ने किया- श्री लालजी भाई पटेल, श्री के. महादेवय्या (क्षेत्र सहसंयोजक), श्री कृष्ण भगवान (आंध्र प्रदेश), श्री नरोत्तम ठाकुर (प्रांत संयोजक हि.प्र.), श्री श्रीनाथ (आंध्र प्रदेश), श्री धर्मेंद्र भदौरिया (म.प्र.), श्री सतेंद्र सरोत (हरियाणा प्रांत सहसंयोजक), श्री सतीश आचार्य (राजस्थान)।

संगठनात्मक : मंच के राष्ट्रीय संगठक श्री कश्मीरी लाल ने संगठन विस्तार के लिए अनेक बिंदूओं पर बल दिया। उन्होंने प्रवास, प्रचार, पत्रक, पत्रिका, प्रदर्शन (5प) का कार्यकर्ताओं को पुनः स्मरण करवाया। साथ ही साथ उन्होंने परिचय एवं प्रयत्न पर भी बल दिया। स्वदेशी का आंदोलन आगे बढ़ाने के लिए अपने स्थायी मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दे जोकि जनता से सीधे जुड़े हुए हो, उनको चिंहित करके आंदोलन चलाने पर बल दिया। विभिन्न विषयों पर व्यवस्थित तरीके से कार्यदल बनाने पर भी उन्होंने बल दिया। नमक आंदोलन, चिपको आंदोलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां पहले जंगल के बारे में यह नारा था कि ‘क्या है जंगल के उपकार-लीसा, लकड़ी और व्यापार‘। चिपको आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को नया नारा दिया ‘क्या है जंगल के उपकार-मिट्टी, पानी और बयार’। यह नारा लोगों को प्रिय हुआ और उत्तराखंड में चिपको आंदोलन सफल हो गया। उन्होंने एफडीआई, जीएम फसलें, विकास का मॉडल, एकात्ममानव दर्शन एवं चीन आदि विभिन्न विषयों पर निम्नलिखित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की।

आगामी कार्यक्रम - संगठनात्मक सत्र में श्री कश्मीरी लाल ने निम्नलिखित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की-
1. 12 दिसंबर - बाबू गेनू बलिदान दिवस
2. कार्यसमिति बैठक - 4-5 मार्च 2017, नई दिल्ली
3. राष्ट्रीय परिषद बैठक - 20-21 मई 2017, गुवाहाटी (असम)
4. एफ.डी.आई., जी.एम., विकास का मॉडल व एकात्ममानव दर्शन पर कार्यक्रम
5. चीन के संबंध में सभी समाचार व सूचनाएं chinaswadeshi@gmail.com पर मेल करें। चीन के विषय पर जिला सम्मेलन/स्कूटर रैली/यात्रा आदि विभिन्न कार्यक्रम करने हैं।
6. नवंबर 2017 में दिल्ली में विशाल कार्यक्रम (विशेष- यह वर्ष वैश्वीकरण के विरूद्ध संघर्ष करते हुए स्वदेशी जागरण मंच का 25वां वर्ष है। मंच के भौगोलिक एवं वैचारिक कार्य विस्तार के लिए सभा में गहन चर्चा हुई जिसके अंतर्गत देश में वर्ष भर में विभिन्न मुद्दों पर जनसंपर्क के अनेक विशाल कार्यक्रम किये जायेंगे। इन सभी कार्यक्रमों को संग्रहित करते हुए नवंबर 2017 में दिल्ली में चीन के विरूद्ध जन-हुंकार भरते हुए एक विशाल कार्यक्रम किया जायेगा।)

नई नियुक्तियां - राष्ट्रीय संयोजक श्री अरूण ओझा ने निम्नलिखित कार्यकर्ताओं को विभिन्न दायित्व प्रदान किये -
अंतर्राष्ट्रीय दायित्वः श्री अरविंद कुमार-अमरीका व यूरोप के देशों में नेटवर्किंग कोर्डिनेटर के रूप में दायित्व निर्वहन करेंगे। (आपने इंडियन इंस्टीटयूट आफ साईंस, बैगलूरू, शिकागो यूनिवर्सिटी अमरीका सहित अन्य स्थानों से शिक्षा ग्रहण की है। आईएमएफ/वर्ल्ड बैंक की कार्य शैली एवं अमरीकी अर्थ-तंत्र की कार्यप्रणाली तथा विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने के उनके तरीके आदि की गहरी समझ है। विकेंद्रित आर्थिक मॉडल आपके रूचि एवं अध्ययन का क्षेत्र है। आप अमरीका में रहते हैं।)

अखिल भारतीय दायित्व : 1. अ.भा. महिला प्रमुख- डॉ. अमिता पत्की (महाराष्ट्र), 2. अ.भा. सह-महिला प्रमुख- श्रीमति अलका सैणी (म.प्र.), श्रीमति सुधा शर्मा (दिल्ली), श्रीमति शीला शर्मा (छत्तीसगढ़) का दायित्व पूर्ववत रहेगा।

अ.भा. कोष प्रमुख : श्री सतपाल शर्मा, दिल्ली (आप व्यवसाय से इंजीनियर हैं एवं कुछ वर्षों से स्वदेशी जागरण मंच की गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय की मरम्मत एवं नवीनीकरण का कार्य आपकी देख-रेख में संपन्न हुआ है।), श्री भोला नाथ विज लघु ऋण वितरण योजनाओं के प्रमुख के रूप में पूर्ववत दायित्व निर्वहन करेंगे।

क्षेत्रीय दायित्व : म.प्र. क्षेत्र सहसंयोजक-प्रो. राघवेंद्र सिंह चंदेल
मध्य प्रदेश - क्षेत्र संघर्ष वाहिनी प्रमुख-श्री चन्द्रमोहन साहू।

प्रांतीय दायित्व : बिहार - सहप्रांत संयोजक-श्री नागेन्द्र, श्री प्रवीण दुबे, श्री यदुनंदन
झारखंड - सहप्रांत संयोजक-श्री पुत्कर हेम्ब्रम
असम - प्रांत संयोजक-श्री दिलीप हजारिका, प्रांत सहसंयोजक-श्री प्रशांत भोई (विशेष असम)
पश्चिमी उत्तर प्रदेश - सहप्रांत संयोजक-श्री अमितेष जी, श्री अनिल कुमार (लोहारी वाले)
उड़ीसा - प्रांत संयोजक-श्री शत्रुघ्न तरई, प्रांत सहसंयोजक-श्री धीरेन्द्र नन्दा
जम्मू-कश्मीर - सहप्रांत संयोजक-श्री विपिन जी
पश्चिम बंगाल - प्रांत सहसंयोजक-श्री अम्लान कुसुम घोष, स्वदेशी चिकित्सा प्रकोष्ठ प्रांत प्रमुख-श्री संजय देव
उत्तराखंड - प्रांत संपर्क प्रमुख-श्री रामकुमार चौधरी
हरियाणा - प्रांत विचार मंडल प्रमुख-डॉ. बलदेव कुमार

विभाग/जिला दायित्वः हरियाणा - श्री अंकेश्वर प्रकाश (अंबाला विभाग संयोजक), प्रो. सोमनाथ सचदेव (कुरूक्षेत्र विभाग संयोजक), प्रो. रणवीर सिंह (कुरूक्षेत्र विभाग विचार विभाग प्रमुख), श्री योगेश कुमार (कुरूक्षेत्र सह जिला संयोजक), श्री दुलीचन्द रमन (करनाल जिला संयोजक)।
महाराष्ट्र - प्रांत महिला प्रमुख-श्रीमति माधुरी जोशी, प्रांत संपर्क प्रमुख-श्री किरण टोले, प्रांत कोष प्रमुख-श्री रामचन्द्र बलगोरबर, प्रांत प्रचार प्रमुख-श्री किशोर पर्निकर

राष्ट्रीय परिषद सदस्यः 1. श्री ईश्वर चन्द खेडे (महाराष्ट्र), 2. श्रीमति रेणु पुराणिक (म.प्र.), 3. श्री पुष्कर लाल पुराणिक (म.प्र.), 4. श्रीमति राजकुमारी शुक्ला (म.प्र.), 5. श्री प्रसाद उपाध्याय (राजस्थान), 6. श्री मोहन भट्टर (राजस्थान), 7. श्री अनिल शुक्ला (राजस्थान), 8. श्री सुरेश खंडेलवाल (राजस्थान), 9. श्री संजय सूरा (हरियाणा), 10. श्रीमति प्रमिला यादव (हरियाणा), 11. श्री लव सारस्वत (प.उ.प्र.), 12. श्री अमलेन्द्र शर्मा (प.उ.प्र.), 13. श्री अनुराग अग्रवाल (प.उ.प्र.), 14. श्री अमितेष अमित (प.उ.प्र.), 15. श्री रामकुमार चौधरी (उत्तराखंड), 16. श्री पृथ्वी पति सचान (अवध), 17. श्रीमति उषा दुबे (बिहार), 18. श्री शिव शंकर तिवारी (बिहार), 19. श्री अंजनि कुमार सिन्हा (झारखंड), 20. श्री प्रभाकर मिश्रा (झारखंड), 21. श्री विजय राउत राय (उड़ीसा), 22. श्री कीर्तन बिहारी दास (उड़ीसा), 24. श्री समीर विश्वास (प. बंगाल)।

अन्यः राष्ट्रीय सह संयोजक श्री सरोज मित्र ने स्वदेशी जागरण मंच का स्वरूप ‘मंच’ का ही बनाए रखने पर अपने विचारों से अवगत करवाया। सौर उर्जा व चीन से सौर उपकरण आयात पर श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ (अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख) ने विषय प्रस्तुत किया। स्वदेशी मेला आयोजित करने की नियमावली से श्री सचिन्द्र बरियार (क्षेत्रीय सह संयोजक) ने अवगत कराया। भारतीय कृषक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कृष्णवीर चौधरी, भारतीय मजदूर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री पवन कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हरियाणा प्रांत प्रचारक श्री सुधीर कुमार सभा में उपस्थित रहे। दिनांक 11 नवंबर को राष्ट्रीय परिषद बैठक, संचालन समिति आदि की बैठकें संपन्न हुई।

प्रांत एवं कार्यविभाग के नाम में परिवर्तनः 1. भविष्य में काशी प्रांत को पूर्वी उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जायेगा।
2. ‘विचार मंडल’ का नाम परिवर्तित किया गया है। भविष्य में यह ‘विचार विभाग’ के रूप में रहेगा।

समारोपः प्रांत संयोजक श्री विजय वत्स व श्री सोमनाथ सचदेव ने व्यवस्था में लगे सभी कार्यकर्ताओं का परिचय कराया। जिसका सभी प्रतिनिधियों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। उड़ीसा के कार्यकर्ता श्री अशोक पाल चौधरी ने प्रख्यात बंगला गीत ‘ओमार जन्म भूमि’ सुमधुर स्वर में प्रस्तुत किया। मंच संचालन श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ ने किया।

श्री अरूण ओझा ने एफडीआई को देश में स्वीकार करने के लिए मंच की ओर से 7 निकष प्रस्तुत किये। 1. इससे सहायक समवर्ती देशी उद्योग (Ancillary Inds) का विकास हो। 2. इससे रोजगार सृजन बढ़े, 3. आय में वृद्वि, 4. निर्यात आमदनी में वृद्धि, 5. प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण, 6. सूचनाओं Management/Data etc. का आदान-प्रदान, 7. जितनी एफडीआई आएं, उतनी ही मात्रा में भारतीय माल को दूसरे देश में बाजार दें। यदि एफडीआई इन निकष पर खरी उतरती है तो स्वदेशी जागरण मंच उसका स्वागत करेगा, अन्यथा विरोध करेगा।

जीएम फसलों के संबंध में उन्होंने कहा ‘ऐसी प्रौद्योगिकी समस्या को जन्म देती है, समाधान नहीं करती। ऐसी प्रौद्योगिकी से जो समस्या उत्पन्न होती है उसके समाधान के लिए दूसरी प्रौद्योगिकी प्रस्तुत की जाती है तथा यह दुष्चक्र चलता रहता है। जीएम से न तो उत्पादन बढ़ता है तथा न ही कीट नाशकों का उपयोग घटता है। बल्कि इसकी आड़ में एक नये प्रकार का जैव साम्राज्यवाद जन्म ले रहा है। मंच देश के बीच व खेती को गुलाम नहीं होने देगा। आईपीआर के नाम पर लूट मची हुई है। प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक श्री एम.स्वामीनाथन के कथन को उद्धत करते हुए कहा कि ‘यह Jobless Growth is joyless growth है। अमरीका की सत्ता परिवर्तन से हमें समझना होगा कि रोबोट और मशीनें वोट डालने नहीं आते।

देश में कुछ आसुरी शक्तियों के द्वारा चलाई जा रही बहस ‘Universal Basic Income’ के सिद्धांत का खुलासा करते हुए कहा कि केलिर्फोनिया यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, लदन स्कूल ऑफ इकनोमिक्स में कार्यरत भारतीय मूल के कुछ अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि भारत में इसे लागू करने के लिए आदर्श परिस्थितियां हैं। भारत में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ पब्लिक फाईनेंस एंड पॉलिसी में कार्यरत एक महानुभाव भी इसका समर्थन कर रहे हैं। इसके अंतर्गत देश एवं जनता के आर्थिक सहित अधिकांशतः संसाधनों को ले लिया जाता है व उन्हें आजीविका चलाने के लिए निश्चित भुगतान प्रति माह या अन्य अंतराल पर किया जाता है। स्विटजरलैंड में 2500 डालर प्रतिमाह की योजना को जनमत संग्रह ने अस्वीकार कर दिया है। केलिफोर्निया में 600 डालर प्रतिमाह का प्रोजेक्ट लागू किया है। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की चर्चा है।

प्रधानमंत्री का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे चीन के द्वारा निर्मित ग्वादर बंदरगाह का उत्तर भारत ने चाबहार बंदरगाह के रूप में दिया, वैसे ही आप आर्थिक विकास की नीतियों में भी वैश्विक नीतियों जैसा परिवर्तन करने के साहस का परिचय दे। महात्मा गांधी व पं. दीनदयाल उपाध्याय के द्वारा दिखाया गया ‘‘स्वदेशी और विकेंद्रीकरण’’ का मार्ग स्वदेशी जागरण मंच के लिए राजनीति नहीं, अपितु आस्था है। राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगडी के कथन ‘‘धर्म की परिधि में रहने वाली व्यवस्था ही स्थायी होगी’’ में हमारा पूरा विश्वास है। ईश्वर हमें शक्ति प्रदान करें।

वन्देमातरम् के गान के साथ ही तेरहवीं राष्ट्रीय सभा संपन्न हो गई।
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