प्रस्ताव-2 (हिन्दी) — कुरूक्षेत्र राष्ट्रीय सभा

स्वदेशी जागरण मंच
13वीं राष्ट्रीय सभा
कुरूक्षेत्र (हरियाणा) - 12-14 नवंबर 2016

रोजगार सृजन हो नीति का आधार

स्वदेशी जागरण मंच देश में घटते रोजगार अवसरों और लगातार घटती रोजगार अवसरों की गुणवत्ता और उसके कारण द्रुतगति से बढ़ती असमानताओं और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में जनसंख्या के पलायन के विषय में गंभीर चिंता व्यक्त करता है। आज स्वरोजगार समाप्त हो रहा है और पहले जो उद्यमी थे, चाहे कृषि में, छोटे-मोटे काम-धंधे में, घरेलू या कुटिर उद्योगों में, वे आकस्मिक यानि दिहाड़ीदार रोजगार पर आश्रित होते जा रहे हैं या ठेकेदारी व्यवस्था में काम करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सरकार और नीति-निर्धारक द्वारा इन संकेतों की पूर्णतया अनदेखी के संदर्भ में स्वदेशी जागरण मंच अपनी नाराजगी, विरोध एवं असंतोष प्रकट करता है।

स्वदेशी जागरण मंच ने पिछले साल अपने जोधपुर अधिवेशन में सरकार को आगाह किया था कि आर्थिक सुधारों के अंतर्गत देश को सस्ते आयातित सामान का बाजार बना दिया है; प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रोत्साहन के महिमा मंडन के चलते हमारे संगठित विनिर्माण क्षेत्र का दो तिहाई विदेशी बहुर्राष्ट्रीय कंपनियों के चंगुल में जा चुका है। लेकिन अत्यंत दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि, बेरोजगारी की दर 2011-12 में 3.8 से बढ़ती हुई, 2015-16 में पिछले पांच सालों में सबसे अधिक 5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, अर्थव्यस्था पर विनाशकारी प्रभावों के बावजुद वहीं नीतियां अभी भी जारी है।

आर्थिक रपटों और अध्यनों से स्पष्ट हो रहा है कि परिस्थिति और अधिक खराब हो रही है, क्योंकि न केवल बहुत कम रोजगार का सृजन हो रहा है (आवश्यक 1.8 करोड़ के बदले मात्र 60 से 80 लाख), वर्तमान रोजगार के अवसर या तो समाप्त हो रहे हैं, या गंभीर रूप से खतरे में हैं। विश्व बैंक की एक रपट ने भविष्यवाणी की है कि केवल मशीनीकरण के कारण भारत में 69 प्रतिशत रोजगार खतरे में है। वैज्ञानिकों द्वारा चेतावनी दी जा रही है कि कृत्रिम बुद्धि और रोबोटीकरण के चलते बड़ी मात्रा में रोजगार को गंभीर खतरा है।

दूसरी ओर, शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और आमदनी में असमानताएं भयावह दर से लगातार बढ़ती हुई पिछले दो दशकों में दुगुनी हो गई है, जिसके कारण उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में इस संदर्भ में हमारे देश का प्रदर्षन सबसे खराब होता जा रहा है। श्रम ब्योरो द्वारा नवीनतम रोजगार पर वार्षिक गृहस्थ सर्वेक्षण के अनुसार ऊपर के 10 प्रतिशत कमाई वाले कामगार नीचे के 10 प्रतिशत कामगारों से 12 गुणा ज्यादा कमा रहे हैं, जबकि 1990 में यह 6 गुणा ही था। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए सरकार रोजगार, गरीबी उन्नमूलन और कीमतों को नियंत्रित रखने के वचन पर सत्ता में आई थी। स्वदेशी जागरण मंच खेद के साथ रेखांकित करना चाहता है कि वायदों के विपरीत निष्पादन संतोषजनक होने से बहुत दूर है, बल्कि सरकार द्वारा उठाए गए कई कदम इसके उल्ट साबित हो रहे हैं। बहुप्रचारित ‘मेक इन इंडिया’ का अर्थव्यवस्था पर कोई विशेष प्रभाव तो दिखता नहीं, लेकिन विविध क्षेत्रों में एफडीआई को खोलकर आर्थिक उन्नयन की परिस्थिति को और उलझा दिया गया है। जबकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद देश में उपलब्ध हैं या बनाए जा सकते हैं, बहुर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादों के आयात की प्राथमिकता के चलते विनिर्माण क्षेत्र द्वारा अधिक रोजगार के अवसरों में वृद्धि पर अंकुश लग रहा है। खरीद प्रक्रिया भी भारतीय उद्योग और सेवा क्षेत्र की समस्याओं को और अधिक बढ़ा रही है।

स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय सभा सरकार से यह मांग करती है कि विदेशी निवेश के मोह को त्यागते हुए बहुर्राष्ट्रीय कंपनियों पर शिकंजा कसा जाए कि वे साजो-सामान की खरीद भारत से ही करे, आयातों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए और रोजगार उन्मुखी विकास की ओर आगे बढ़े। ग्रामीण क्षेत्रों में विविध कृषि आधारित गतिविधियों जैसे, पशुपालन, मुर्गीपालन, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्यन, मधु उत्पादन आदि को बढ़ावा देते हुए, गांवों में ही लाभकारी रोजगार के अवसर निर्माण हो और गांवों से शहरों की ओर पलायन बंद हो।