12th National Convention, Jodhpur (Raj.) — Resolution 4 (H)

कृषि निवेश और पेटेंट व्यापार वार्ताओं से बाहर किया जाए



नैरोबी (कैन्या) में 19 दिसंबर 2015 को संपन्न विश्व व्यापार संगठन के मंत्री सम्मेलन में जिस प्रकार से विकासशील देशों के हितों के विपरीत दोहा विकास चक्र को तिलांजली दे दी गई और विकसित देशों द्वारा कृषि को दी जाने वाली भारी सब्सिडी के चलते आयातों की बाढ के फलस्वरूप हमारे किसानों और कृषि को भारी संकट से बचाने हेतु विशेष बचाव उपायों (एसएसएम) और खाद्य सुरक्षा हेतु सरकार द्वारा खाद्यान्न खरीद पर सब्सिडी गणना की गलती को सुधारने हेतु समाधान देने में भी विकसित देशों की आनाकानी से यह स्पष्ट हो गया है कि विश्व व्यापार संगठन में हुए पूर्व के समझौतों से विकासशील देशों और विशेष तौर पर भारत को भारी कठिनाईयों से गुजरना पड़ रहा है। विदेशों से सब्सिडी युक्त कृषि पदार्थों की बाढ के कारण हमारे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता और कृषि लगातार अलाभकारी होती जा रही है और हमें अपनी गरीब जनता की खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने में भी संघर्ष करना पड़ रहा है। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्री ने भी कहा है कि दोहा विकास चक्र को आगे बढाने में असफल होने के कारण वे अत्यन्त निराश है।

यह एक खुला सत्य है कि विश्व व्यापार संगठन के बनने के समय हुआ मराकेश समझौता विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों पर दबाव बनाकर उनके हितों के विपरीत करवाया गया, जिसमें कृषि, निवेश, पेटेंट और सेवाओं जैसे विषयों को शामिल करते हुए, विकासशील देशों के शोषण का तंत्र तैयार किया गया। ’ट्रिप्स’ के नाम पर बाध्यकारी समझौता करते हुए भारत और अन्य देशों को अपना पेटेंट कानून बदलने के लिए बाध्य किया गया ताकि अमरीका और अन्य विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों के पेटेंट अधिकारों के बदले में उन्हें अधिकाधिक रायल्टी मिल सके। ऐसे में कहा गया कि दवाईयां तो मंहगी होगी लेकिन हमारे किसानों को इस समझौते से लाभ होगा क्योंकि वे विकसित देशों को अपने उत्पादों को निर्यात कर सकेंगे। लेकिन मराकेश समझौते में दिए वचन से मुकरते हुए विकसित देशों ने अपनी कृषि सब्सिडी को घटाने के बजाए ’ग्रीन बाॅक्स’ के नाम पर उसे और बढा दिया। विकसित देशों ने अपनी सब्सिडी को घटाया नहीं और भारत में खाद्य सुरक्षा हेतु किसानों से सीधा अनाज की खरीद पर विश्व व्यापार संगठन में आपत्ति जरूर दर्ज कर दी।

मराकेश में हुए ट्रिप्स समझौते के कारण आज विकसित देशों की दवा निर्माता बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों द्वारा दवाईयों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। लेकिन उस समझौते में उपलब्ध लचीलेपन जैसे इन कम्पनीयांे द्वारा गलत तरीके से पुनः पेटेंटीकरण पर रोक, अनिवार्य पेटेंट की सम्भावनाओं, पेटेंट पूर्व आपत्ति दर्ज करने के प्रावधान और पेटेंट लेने से पहले क्लीनिकल ट्रायल आंकड़ांे को उपलब्ध कराने की अनिवार्यता आदि को समाप्त करवाने के लिए विकसित देश, विशेष तौर पर अमरीकी सरकार, भारत सरकार पर दबाव बना रही है। प्रधानमंत्री जी की अमरीका यात्रा के दौरान भारत-अमरीका सयंुक्त कार्यदल और साथ ही साथ ’थिंक टैंक’ की निर्मिति के माध्यम से भारत और अन्य विकासशील देशों को प्राप्त सुविधा को समाप्त करवाने का प्रयास हो रहा है।

स्पष्ट है कि मराकेश समझौते के कारण हमारी कृषि और किसान ही नहीं बल्कि आमजन की खाद्य सुरक्षा भी गंभीर संकट में है। दवाईयां मंहगी होने के कारण हमारा जन-स्वास्थ्य ही खतरे में नहीं है, बल्कि ट्रिप्स में उपलब्ध छूटों के कारण हमारी स्वदेशी दवा कंपनियां, जो 200 से भी ज्यादा देशांे को सस्ती दवाईयां निर्यात कर विकासशील देशों की ही नहीं बल्कि विकसित देशों की गरीब जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मुख्य भूमिका का निर्वहन कर रही हैं, के उत्पादन को भी बाधित करने का प्रयास हो रहा है।

इन परिस्थितियों में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन का यह सुविचारित मत है कि मराकेश के असमान और शोषणकारी समझौते से उत्पन्न समस्याओं के संदर्भ में राष्ट्रीय बहस और विगत 20 वर्षों के अनुभव के आधार पर सरकार एक व्यापक समीक्षा करवाए। देश की कृषि और विज्ञान को बचाने, जनस्वास्थ्य और उद्योगों की रक्षा हेतु कृषि ‘ट्रिप्स’ और ’ट्रिप्स’ (विशेष तौर पर पेटेंट) को विश्व व्यापार संगठन से बाहर करवाने हेतु सघन प्रयास किए जाए। विश्व व्यापार संगठन में राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर विकसित देशों के दबाव में आकर किसी प्रकार का समझौता न करें। आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत विकासशील देशों का नेतृत्व करते हुए विश्व व्यापार संगठन में आमूल बदलाव के लिए आगे बढ़े।

यह स्मरण कराते हुए कि विश्व व्यापार संगठन में सभी निर्णय सर्वसम्मिति से होते है स्वदेशी जागरण मंच का यह राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात पर बल देता है कि मिडिया में क्षोभ व्यक्त करने के स्थान पर वार्ताकक्ष में दोहा वार्ता की भांति अपना पक्ष दृढतापूर्वक रखते हुए उस पर अडिग रहना चाहिए।