National Council Meeting Ahmedabad - Resolution-2 (H)

राष्ट्रीय परिषद, अहमदाबाद, गुजरात (5-6 मई, 2018)

प्रस्ताव-2
स्वास्थ्य को सर्वसुलभकारी बनाया जाए

2014 में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण ने उद्घाटित किया कि सकल राष्ट्रीय उत्पाद के प्रतिशत के संदर्भ में स्वास्थ्य पर प्रतिव्यक्ति निजी खर्च दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसममें से प्रमुख हिस्सा 68 से 72 प्रतिशत दवाओं पर खर्च किया जा रहा है।

स्वदेशी जागरण मंच का अनुभव है कि अधिकांश योजनाएं एवं गतिविधियां जो भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत की गई, वे ‘स्वास्थ्य रक्षा’ के स्थान पर ‘चिकित्सा रक्षा’ पर केंद्रित है। अधिक ध्यान एवं प्रयास अस्पताल खोलना, स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की ओर है, जो अच्छा है। किंतु स्वास्थ्य सुरक्षा की चेतना के प्रति बराबर ध्यान दिया जाना भी उतना ही आवश्यक है।

यह भी ध्यान में आता है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में आयुष एवं अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की अपेक्षा एलोपैथी उपचार पर अधिक महत्व है। स्वदेशी जागरण मंच यह अनुभव करता है कि आयुष-आयुर्वेद सिद्ध एवं यूनानी जैसी सुलभ एवं कम खर्चीली चिकित्सा पद्धतियों की ओर भी पर्याप्त ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। आयुष योजना को शोध हेतु अधिक वित्तीय सहयोग दिया जाना चाहिए। आयुर्वेदिक चिकित्सक वनौषधियों की उपलब्धता और अन्य अनुपूरक साधनों के क्षेत्र को सहायता दिये जाने की आवश्यकता है।

स्वदेशी जागरण मंच सरकारी योजना के अंतर्गत जन-औषधी भंडार जिनके माध्यम से सस्ती सुलभ कीमतों पर दवा वितरण के प्रयास की सराहना करता है। यद्यपि यह सुविधा आकार और विस्तार में मांग की दृष्टि से पर्याप्त नहीं है।

स्वदेशी जागरण मंच अनुभव करता है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य नियंत्रण मंडल (एनपीपीए) जो कि अपरिहार्य दवाओं के मूल्यों पर नियंत्रण रखने के लिए महत्वपूर्ण घटक है, जिसे निरंतर निहित स्वार्थ के अंतर्गत कमजोर एवं निष्प्रभावी बनाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किये जा रहे है। वस्तुतः इससे उलट और अधिक आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा सहायक उपकरणों को एनपीपीए के नियंत्रण में लाने की आवश्यकता है। आवश्यक दवाओं के मूल्य नियंत्रण में बाजार आधारित मूल्य निर्धारण निष्प्रभावी रहा है। अतः ‘लागत आधारित मूल्य प्रादर्श’ पर वापस लोटने की आवश्यकता है। अत्यावश्यक दवाओं के मूल्य निर्धारण में बाजारकीय अवधारणा व्यावहारिक एवं युक्तियुक्त नहीं है।

स्वदेशी जागरण मंच का यह भी अनुभव है कि निहित स्वार्थ न केवल स्वास्थ्य योजना निर्माण में प्रभावी दखल दे रहे हैं, वरन् चिकित्सकों के माध्यम से उनके हित साधन की दवाओं की पर्ची लिखवाने तक प्रभावी हैं। बिल मेलिंडा गेटस फाउंडेशन को स्वदेशी जागरण मंच द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिस पर सरकार द्वारा और ज्यादा कार्यवाही की जरूरत है।

स्वदेशी जागरण मंच केंद्र सरकार द्वारा लागू राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना का स्वागत करता है, जहां प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य रक्षा का क्रियान्वयन किया जाना है। प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में सुविधाएं एवं क्षमताएं बढ़ाने का प्रस्ताव एक अच्छा कदम है। यद्यपि जन-स्वास्थ्य, घर एवं शासकीय अस्पतालों के विकसित केंद्रों से प्रतिस्पर्धा अच्छा कदम नहीं है। इसी प्रकार उच्च गुणवत्तायुक्त तृतीयक स्तर पर निजी क्षेत्र को अनुमति देना, गंभीर रोगों में अत्यंत खर्चीली उपचार पद्धति को प्रक्षय देगा।

स्वदेशी जागरण मंच भारत सरकार द्वारा जारी आयुष्मान भारत योजना की सराहना करता है, जिसमें 50 करोड़ लाभार्थी द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ बीमा योजना द्वारा अनुमानित है। स्वदेशी जागरण मंच सरकार की राष्ट्रीय परिषद सरकार आगाह करती है कि इस अभियान में विदेशी बीमा कंपनियों को जो भारत में कार्यरत है और शुद्ध लाभ कमाने के उद्देश्य पर आधारित है, उन्हें प्रवेश न दे।

स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद मांग करती है कि -
1. वृहत स्तर पर रोग निवारण पेयजल उपलब्धता, शिशुओं के लिये पोषक आहार, ग्राम स्तर पर स्वच्छता आदि स्वास्थ्य सुरक्षा निवारण हेतु योजनाएं बनाकर लागू करें।
2. उपचार के ‘आयुष‘ तंत्र को आगे बढ़ाए, आयुष चिकित्सकों की उपलब्धता हो, जड़ी-बूटियों, वनोषधियों की खेती हो, उन्हें स्तरीय मानकों के अनुरूप बनाया जाये।
3. राष्ट्रीय औषध मूल्य नियंत्रण (एनपीपीए) को सक्षम किया जाए। उसकी शक्तियों को अत्यावश्यक दवाओं और उपकरणों के क्षेत्र में कम न किया जाए। लागत आधारित विधि मूल्य निर्धारण के लिए लागू की जाए, न कि बाजार आधारित मूल्य विधि।
4. स्वास्थ्य योजनाओं संबंधी गतिविधियों में विदेशी उपक्रमों की निहित स्वार्थ के साथ दखलअंदाजी तुरंत समाप्त की जाए।
5. जन-स्वास्थ्य सुरक्षा को निजी क्षेत्र एवं बीमा कंपनियों के हाथों में न छोड़ा जाए।