National Council Meeting at Bhopal — Resolution 1

ई-कामॅर्स और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों एवं खाद्य मार्केटिंग में विदेशी निवेश वापिस हो!



स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद सरकार द्वारा ई-कॉमर्स और खाद्य प्रसंस्करण एवं खाद्य वस्तुओं के विपणन में विदेशी निवेश को अनुमति के लिए क्षोभ एवं विरोध प्रकट करती है। ज्ञात हो कि ई-कॉमर्स में कई विदेशी कंपनियां लंबे समय से गैर कानूनी रूप से कार्यरत है।

स्वदेशी जागरण मंच सरकार को निरंतर चेतावनी देता रहा है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां और विदेशी पूंजी प्राप्त पूर्व में भारत में निर्मित कंपनियां अपनी आर्थिक शक्ति का दुरूपयोग करते हुए, हिंसक कीमत नीति के माध्यम से (देश से थोक और खुदरा दोनों प्रकार के) छोटे-बडे व्यापारियों, पुस्तक विक्रेंताओं, दवा विक्रेताओं और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा से बाहर करने का काम कर रही हैं। ई-कॉमर्स में विदेशी निवेश कानूनी रूप से प्रतिबंधित रहा है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ई-कॉमर्स कंपनियों को कार्य करने दिया जा रहा है। यह कहा गया है कि विदेशी कंपनियां वास्तव में ई-कॉमर्स कर ही नहीं रही हैं, वे तो केवल ‘मार्केट प्लेटफार्म’ उपलब्ध करा रही हैं और विक्रेताओं को अपनी वेबसाइटों के माध्यम से सामान बेचने का अवसर दे रही हैं।

स्वदेशी जागरण मंच ने हमेशा से ही कहा है कि चूंकि यह कंपनियां अपनी आर्थिक शक्ति के बलबूते, भारी छूट (डिस्काउंट) देती हैं और कई मामलों में स्टॉक भी करती हैं, इसलिए यह कहना कि ये कंपनियों ई-कॉर्मस नहीं करती हैं, वास्तव में सही नहीं हैं। गैर कानूनी रूप से काम करने वाली ई-कॉमर्स कंपनियां टैक्स चोरी भी करती रही हैं, जिसके संबंध में कई मामलों में जांच भी चल रही हैं। इस बारे में सरकार से अपेक्षा थी कि वह इनको प्रतिबंधित करेगी। लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार ने अब इन विदेशी कंपनियों को मान्यता देते हुए ई-कॉमर्स में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को अनुमति प्रदान कर दी है। यानि कानून तोडने वालों को पुरस्कृत किया गया है, यह उचित नहीं है।

हालांकि सरकार का कहना है कि ई-कॉमर्स में विदेशी निवेश को अनुमति केवल ‘मार्क्रेट प्लेटफॉर्म’ मॉडल के लिए है और कंपनियों को छूट देकर कीमतों को प्रभावित करने के लिए रोक लगाई गई है। लेकिन स्वदेशी जागरण मंच का यह मानना है कि इस संबंध मेंं विदेशी कंपनियों के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित करने के प्रावधान नहीं हैं।

सर्वविदित है कि स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के प्रयास से खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के विरोध में एक राष्ट्रीय आंदोलन खडा हुआ और उसके चलते धोखे से संसद में कानून पारित होने के बावजूद कोई बड़ा विदेशी निवेश खुदरा क्षेत्र में नहीं हो पाया। स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद यह स्मरण करवाना चाहती है कि वर्तमान में केन्द्र में एन.डी.ए. सरकार नेतृत्व कर रही है, भारतीय जनता पार्टी ने खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया था और अपने चुनाव खोषणा पत्र में भी यह वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद विदेशी निवेश को अनुमति देने वाले कानून को बदला जायेगा। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि कानून को तो बदला नहीं गया, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) में विदेशी निवेश आकृष्ट करने के नाम पर खाद्य प्रसंस्करण और देश में उत्पादित खाद्य पदार्थों के विपणन में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को अनुमति प्रदान कर दी है।

सरकार का यह कदम न केवल लघु-कुटीर क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए घातक सिद्ध होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार निर्माण के महत्वपूर्ण अवसर को भी गंवा देगा। वास्तव में यदि सरकार ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आमदनी को दुगना करना चाहती है तो उसके लिए ग्रामीण स्तर पर विकेन्द्रित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने होंगे और गांवों में ही रोजगार का निर्माण करना होगा। यही नहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और खाद्य मार्केटिंग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को अनुमति, खाद्य पदार्थों में एकाधिकार को बढ़ावा देगा।

स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय परिषद मांग करती है देश में छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों और किसानों के हितों के संरक्षण हेतु सरकार ई-कॉमर्स, खाद्य प्रसंस्करण अैर मार्केटिंग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को अनुमति देने वाले अपने निर्णयों को वापिस ले। स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय परिषद सरकार को चेतावनी देती है कि वह इस प्रकार के निर्णयों से बचे। राष्ट्रीय परिषद अपने सभी सहयोगी संगठनों सहित सभी कार्यकर्ताओं का आवाह्न करती है कि सरकार के इन निर्णयों के विरोध में व्यापक जन जागरण करें।