Resolution-1 (Madurai Sammelan)-H

13वां राष्ट्रीय सम्मेलन, 18,19,20 जनवरी 2019 (मदुरै, तमिलनाडू)

प्रस्ताव-1
घुसपैठ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति एवं सुरक्षा पर घुसपैठ के गंभीर परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं। आज देश मेें 4 करोड़ से अधिक घुसपैठिये हैं एवं उनमें से अधिकांश बांग्लादेशी हैं। असम एवं पश्चिम बंगाल घुसपैठ से सर्वाधिक आक्रांत राज्य हैं। किंतु आज घुसपैठ देश के समस्त राज्यों में तेजी से फैलती हुई दक्षिण भारत यथा केरल, तमिलनाडू एवं कर्नाटक में भी अपने पैर पसार चुकी है। अतः वर्तमान परिदृश्य में घुसपैठ किसी विशेष क्षेत्र की समस्या न होकर एक राष्ट्रीय समस्या का स्वरूप ले चुकी है।

भारत पूर्व से ही अपर्याप्त रोजगार के अवसरों एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है। घुसपैठियों की लगातार बढ़ती संख्या बेरोजगारी की समस्या को विकराल बना रही है। घुसपैठिये भारत के युवाओं की नौकरियां छीन रहे हैं। निर्माण, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, कृषि जैसे अनेक क्षेत्रों में घुसपैठिये रोजगार पर कब्जा जमा रहे है। अतः मांग और पूर्ति के अर्थशास्त्र के नियम के अनुसार भारतीय मजदूरों के रोजगार के अवसर निरंतर कम होते जा रहे हैं।

बढ़ती मुद्रास्फीतिः उत्पादन के स्रोत स्थिर हैं किंतु उत्पादित वस्तुओं की मंाग घुसपैठ के कारण निरंतर बढ़ रही है। अतः अर्थशास्त्र के मांग एवं पूर्ति सिद्धांत के अनुसार मुद्रास्फीति में निरंतर वृद्धि हो रही है।

धन बहिर्गमनः मजदूरी के रूप में घुसपैठियों द्वारा कमाई गई राषि का बड़ा भाग वे अपने गृहदेश में भेजते हैं, फलस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

शासकीय संसाधनों पर कब्जाः घुसपैठिये अपनी बढ़ती संख्या के कारण अनेक विधानसभा, लोकसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हुए अपनी मजबूत पकड़ बनाकर लाभकारी योजनाओं एवं परियोजनाओं का बड़े पैमाने पर लाभ उठा रहे हैं। इस प्रकार देश के नागरिकों की गाढ़ी कमाई के बडे हिस्से का वे दुरूपयोग कर रहे है।

भूमि अतिक्रमणः अधिकांश शासकीय महत्व के स्थलों एवं संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों जैसे राजमार्ग, रेलवे लाइन, हवाई अड्डे आदि के पास घुसपैठिये अवैध अतिक्रमण कर लेते हैं। जिससे अधोसंरचना विकास को क्षति पहुंचती है एवं विरूपण की संभावना बनती है। कभी-कभी स्थानीय भूमि पुत्रों की जमीन पर बलात कब्जा घुसपैठिये कर लेते हैं जिससे बलवे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कोकड़ाझार असम में 2012 में हुए दंगें इसका उदाहरण है।

राष्ट्रीय सुरक्षाः अधिकांश प्रकरणों में घुसपैठिये भूमि पर अतिक्रमण कर झुग्गी बस्ती बसा लेते हैं जो अवैधानिक गतिविधियों का कंेद्र और अपराधियों की आश्रय स्थली बन जाती है और महानगरों में कानून व्यवस्था एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न हो जाती है।

खुदरा व्यापार पर दुष्प्रभावः घुसपैठियों द्वारा फुटपाथी व्यवसाय, गांव एवं षहरों में फेरी वाले व्यवसाय और स्थानीय खुदरा व्यापार में लगे नागरिकों के रोजगार को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं।

1988 से 2018 के बीच में देशी मूल के लोगों की घटती जनसंख्या का विश्लेषण

जिला देशी मूल के लोगों की जनसंख्या (1988) देशी मूल के लोगों की जनसंख्या (2018)
मुर्शिदाबाद 71 37
माल्दा 63 49
नादिया 77 57
उत्तर 24 परगना 81 52
दक्षिण 24 परगना 83 54
उत्तर दिनाजपुर 91 67
दक्षिण दिनाजपुर 74 44
बरपेटा (आसाम) 60 28

(उल्लेखनीय है कि उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर चिकन नेक का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र का जनसांख्यिकीय परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।)

जनसांख्यिकीय परिवर्तनः बडी संख्या में घुसपैठ के परिणामस्वरूप जनसांख्यिकीय परिवर्तन से स्थानीय मूल का देशी जन समुदाय अल्पसंख्यक हो रहा है तथा अपने अधिकारों से वंचित हो रहा हैं। मूल देशी जनता के हाथ से रोजगार विदेशी घुसपैठियों के हाथ में जा रहा है तथा वह जानमाल के खतरे से पलायन कर रहा है। क्षेत्र के अधिकांश इलाकों में स्थानीय देशी जन समुदाय पिछले 30 वर्षों में अल्पसंख्यक में तब्दील हो चुका है। यह कुछ जिलों में हुए जनसांख्यिकी परिवर्तन की झलक मात्र है। किंतु दिल्ली, मंुबई, कलकत्ता जैसे महानगर सहित किसी न किसी परिमाण में देश के लगभग संपूर्ण राज्य प्रभावित हो रहे हैं।

देश को, स्वयं को, घुसपैठ जन्य समस्याओं से बचाने के लिए हम घुसपैठ के विरूद्ध विरोध दर्ज करते हैं।

13वां राष्ट्रीय सम्मेलन में स्वदेशी जागरण मंच मांग करता है कि- भारत सरकार सीमाओं को सील करें, पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा की तरह बांग्लादेश से लगी पूर्वी सीमा को भी सील किया जाये और सीधे सेना के हस्तगत किया जाये। देश के सभी राजनैतिक दल लोकसभा 2019 चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र में घुसपैठ और इससे उत्पन्न समस्या पर अपने अभिमत का स्पष्ट उल्लेख करें।

राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन (एनआरसी)ः संपूर्ण देश के लिए राष्ट्रीय नागरिकों का पंजीयन लागू किया जाये एवं घुसपैठियों की पहचान कर उनहें देश से बाहर किया जाये।

देशवासियों से अपील - देशवासियों से देश की सामाजिक, आर्थिक और आंतरिक व वाह्य सुरक्षा एवं घुसपैठियों एवं घुसपैठजन्य समस्याओं से मुक्ति के लिए हम घुसपैठियों को प्रश्रय नहीं दें और रोजगार नहीं दें, देशहित में किसी भी प्रकार की सहायता न करें।