Resolution-3 (Madurai Sammelan)-H

13वां राष्ट्रीय सम्मेलन, 18,19,20 जनवरी 2019 (मदुरै, तमिलनाडू)

प्रस्ताव-3
सरकार लाए एक मजबूत ई-काॅमर्स नीति

ई-काॅमर्स कंपनियों द्वारा चालाकीपूर्ण मूल्य निर्धारण, उत्पादों की कीमतों में भारी छूट, विदेशी निवेश के निषेध की अनदेखी करते हुए कैश बर्निंग माॅडल के माध्यम से भारत के छोटे दुकानदारों को अनुचित प्रतिस्पर्धा के सामने धकेल कर उनकी रोजी रोटी पर चोट पहुंचाई है। खुदरा व्यापार में लगे 13 करोड भारतीय, करोड़ों की संख्या में लघु-मध्यम उद्योगों में लगे लोग एवं लाखों युवाओं के ई-काॅमर्स के छोटे-छोटे उपक्रमों के अस्तित्व के खतरे के प्रति स्वदेशी जागरण मंच चिंतित है।

अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, अलीबाबा, उबर, ओला आदि हमारी वर्तमान व्यवस्था को निगलने के लिए आतुर है। देश का कानून ई-काॅमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति नहीं देता, लेकिन ये चालबाज कंपनियां बचने के रास्ते ढूंढ लेती है। यहीं नहीं इन भीमकाय कंपनियों की अनेक सहायक कंपनियां होती है, जिनके उत्पाद ये कंपनियां अपने प्लेटफार्म से बेचती है। जैसे-अमेजन की क्लाउड टेल लि., फ्लिपकार्ट की डब्ल्यूएस रिटेल की कुल विक्रय में 40 से 80 प्रतिशत भागीदारी है।

हाल ही में ई-कामर्स के संबंध में दो प्रमुख परिवर्तन हुए है, जो कि नीतिगत स्तर पर स्पष्टता की आवश्यकता को रेखांकित करते है। डब्ल्यूटीओ की पिछली मंत्रीस्तरीय सभा में जो ब्यूनस आयर्स अर्जेंटाईना में संपन्न हुई, विकसित देशों द्वारा ई-काॅमर्स को डब्ल्यूटीओ व्यापार समझौता वार्ता में शामिल करने के पुरजोर प्रयास किये गये। विभिन्न द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय व्यापार समझौतों में, विशेषतः क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में भी भारत पर दबाव डाला गया कि वह ई-काॅमर्स पर अपना रूख स्पष्ट करते हुए समझौता वार्ता में शामिल हो।

पूर्व में भारत सरकार की इस दिषा में स्पष्ट नीति नहीं होने से ये कंपनियां बहुत तेजी से भारत के उपभोक्ता के बीच पहुंचकर अपने लुभावने हथकंडों से अपनी पहंुच बना चुकी है। वर्तमान सरकार ने देष के अर्थतंत्र में छोटे दुकानदारों, फेरीवालों का योगदान बना रहे और उनका जीविका निर्वाह होता रहे, इसके लिए डीआईपीपी (डिपार्टमेंट आॅफ इंडस्ट्रीयल पाॅलिसी एंड प्रोमोशन) के माध्यम से प्रेस नोट-2 जारी कर इस संकट को सुलझाने की इच्छाशक्ति प्रकट की है। डीआईपीपी द्वारा जारी निर्देषों में ई-काॅमर्स कंपनियों द्वारा मनमाने मूल्य निर्धारण, कीमतों में भारी छूट प्रदान करना, विदेशी निवेश नियमों का उल्लंघन करना, इन सब पर स्पष्ट अंकुश लगाने का प्रावधान है एवं आवश्यक होने पर कंपनियों के मनमाने आचरण को रोकने के लिए कठोर कानूनी कार्यवाही करने के लिए नियंत्रक बनाने का भी प्रावधान है।

स्वदेशी जागरण मंच सरकार के डीआईपीपी द्वारा जारी नवीन दिशा निर्देशों के प्रति आशांवित है, किंतु सरकार को सचेत भी करना चाहता है कि नियमों के कठोर अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए इन कंपनियों के कपटपूर्ण व्यवहार को पहचानकर उन्हें किसी भी प्रकार की रियायत न दें।

चीन भी इस क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी है। अभी स्वदेशी जागरण मंच ने शोध कर पता लगाया कि 2 लाख पार्सल ई-काॅमर्स चैनल का उपयोग कर भारत आ रहे हैं। यहीं नहीं अप्रवासी भारतीयों को 5 हजार रूपये की उपहार भेजने हेतु दी गई छूट का लाभ भी ये चीनी एप उठा रहे हैं। चीनी पोस्ट से भारत की पोस्ट पर कस्टम डयूटी से बचकर गिफ्ट की आड़ में माल बेचने का कंपनियों का खेल चल रहा है। भारी सब्सिडी प्राप्त उत्पाद जहाजों से भेजे जा रहे हैं।

स्वदेशी जागरण मंच यह मांग करता है कि भारत के एमएसएमई क्षेत्र को संबल देने के लिए तुरंत इस प्रकार से देश में पहंुच रहे चीनी उत्पादों के अवैधानिक प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई जाये। वैश्विक भीमकाय ई-काॅमर्स की चालबाजियों पर तत्काल प्रभाव से अंकुंश लगाकर उनके द्वारा किये जा रहे खुदरा व्यापार के स्थानीय तंत्र के शोषण को अविलंब रोकने के लिए कठोर कदम उठाये जाये।