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खतरनाक है गर्मी की आपदा 

By Dr. Dinesh Prasad Mishra • 20 May 2026
खतरनाक है गर्मी की आपदा 

जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ी है। गर्मी के बढ़ने से लोगों की परेशानियों भी बढ़ी है। आगे के दिन और अधिक कठिन होने के संकेत हैं। - डॉ. दिनेश प्रसाद मिश्र

 

प्रसिद्ध प्रकृतिवादी इतिहासकार डेविड एटनबरो ने कुछ समय पहले एक सेमिनार के दौरान अपने हालिया शोध के आधार पर चेतावनी दी थी,  “भीषण गर्मी केवल असुविधा नहीं है, यह मानव अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है।”

देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय आग की भट्ठी बना हुआ है। उत्तर से लेकर मध्य भारत तक ज्यादातर शहरों में औसत तापमान इस वर्ष सामान्य से 3-5 डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा है। मौसम विज्ञानियों की राय है कि अल नीनो की वजह से गर्मी अभी और अधिक परेशान कर सकती है। 

तपती और चिलचिलाती गर्मी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़ती गर्मी से निजात पाने के लिए राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है। दिल्ली में आयोजित कैबिनेट मीटिंग के दौरान उन्होंने सभी मंत्रालयों से कहा है कि हीट वेव से लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों तथा नागरिकों के सामूहिक प्रयास की बात को गंभीरता से रेखांकित किया है। उन्होंने इस बाबत जरूरत के अनुसार कार्य योजना तैयार करने के लिए संबंधित मंत्रालयों को निर्देश भी दिया है। प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा है कि हीट वेव का मामला केवल मौसम का मामला नहीं रह गया है इससे बचाव के लिए हमें दीर्घकालिक योजना तैयार करनी चाहिए।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार 27 अप्रैल, 19 मई, 26 तथा 27 मई चार ऐसे दिन गुज़रे जब धरती के सबसे ज्यादा गर्म 50 शहरों में सभी नाम भारत के शहरों के थे। विश्व स्वास्थय संगठन की हालिया रिपोर्ट भी यही चेतावनी दे रही है कि देश के 50 प्रतिशत से ज्यादा शहरों में भीषण गर्मी का खतरा ‘अधिक’ से आगे बढ़कर ‘बेहद अधिक’ के स्तर तक पहुंच चुका है। लू वाले दिनों में भी बेहद बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2015 से 2020 के दौरान लू वाले दिनों का औसत 7.4 और वर्ष 2020 से 2022 के 9.5 दिन से बढ़कर 32.2 दिन तक का हो गया है और इसकी मियाद लगातार बढ़ती ही जा रही है।

भारत में गर्मी अब हर साल एक नया रिकॉर्ड बना रही है। चिंता की बात यह है कि दिन तो तपते ही हैं अब रातें भी राहत देने वाली नहीं रही। मई की 20 तारीख को दिल्ली ने 13 साल की सबसे गर्म रात देखी जबकि 25 मई की रात को यह रिकॉर्ड भी टूट गया और उस रात 14 साल में सर्वाधिक गर्मी विभाग द्वारा दर्ज की गई। 25 मई को न्यूनतम तापमान सामान्य से 5.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। कूलर, एसी जैसे उपकरण रात को ठंडा करने में नाकाम रहे। रातें पूरी तरह से हीटर बनी रही। देश की राजधानी दिल्ली के कई स्थानों पर रात का न्यूनतम तापमान 32.5 डिग्री तक दर्ज हुआ। इन  दिनों भीषण गर्मी और लू के चलते बेहाल लोगों द्वारा बिजली की मांग भी पारे की तरह बढी है।

भारत इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा गर्म जगह में से एक बनकर सामने आया है। देश की 76 प्रतिशत आबादी सामान्य से अधिक गर्मी के बीच जीवन जीने के लिए मजबूर है। साल दर साल गर्मी बढ़ने की वजह से सार्वजनिक स्वास्थय पर संकट गहराता जा रहा है। हीट वेव की तीव्रता तथा समय सीमा बढ़ने के कारण लोग हलकान हैं। शहरों पर संकट अधिक है। शहरों में कंक्रीट के घर बढ़ रहे हैं जबकि हरियाली लगातार कम हो रही है। कंकरीट स्ट्रक्चर्स और प्रदूषण की वजह से अधिकांश शहरी “अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट” झेल रहे हैं। 

मौसम की यह मार दो तरफा है। आम लोगों के स्वास्थय पर तो गंभीर प्रतिकूल असर पड़ ही रहा है अत्यधिक गर्मी के कारण अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी सुस्त पड़ जाती है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक 2025 में हीट स्ट्रोक के सात हजार से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए थे। हालांकि हमारे देश में हीट स्ट्रोक और उससे होने वाली मौतों का सही आंकड़ा कभी रिपोर्ट नहीं हो पाता है। यह एक मोटे अनुमान के आधार पर जारी किया जाता रहा है। जबकि वास्तविक आंकड़ा बहुत बड़ा होता है। देश की एक बड़ी आबादी मौसम का सीधा वार झेलती है। गिग वर्कर्स, दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर्स के रूप में असंख्य कामगार धूप की परवाह किए बगैर बाहर निकलते हैं। यह वह लोग हैं जो अगर घर पर बैठ जाएं तो उनका काम नहीं चल सकता। उनके बैठने से देश के काम की रफ्तार भी धीमी हो पड़ जाएगी। विश्व स्वास्थय संगठन के मुताबिक 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या में लगभग 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

गर्मी के कारण कार्य क्षमता पर भी सीधा असर पड़ता है। काम के घंटे तो कम होते ही हैं उत्पादकता भी कम हो जाती है जो कि अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। मैकेंजी ग्लोबल इंस्टिट्यूट के आकलन के मुताबिक वर्ष 2030 तक गर्मी की वजह से सकल घरेलू उत्पाद पर भी बड़ा नकारात्मक प्रभाव दिख सकता है। 

गर्मी का यह प्रचंड रूप तथा गर्मी को लेकर विभिन्न राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी तथा बड़ी आपदा का संकेत दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के और अधिक बिगड़ने की आशंका है। 

प्रधानमंत्री ने बढ़ती गर्मी की समस्या को गंभीरता से लिया है तथा विभिन्न मंत्रालयों को इसके लिए कमर कसने का निर्देश भी दिया है। प्रधानमंत्री की यह अपील कि ‘गर्मी भी एक आपदा है’, और इसके निवारण के लिए आवश्यक एहतियाती कदम हर हाल में उठाए ही जाने चाहिए, अति प्रासंगिक भी है और जरूरी भी है। गर्मी को ज्यादा गंभीरता से लेने और सावधानी बरतने की सलाह देते हुए उन्होंने गर्मी से होने वाली परेशानियों को नजरअंदाज न करने और दूसरों का भी ख्याल रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि दरअसल हीट वेव को राष्ट्रीय आपदा की तरह देखा जाना चाहिए और जिस तरह बाढ़, भूस्खलन या इस तरह के दूसरे संकट के समय लोग एकजुट हो जाते हैं इस तरह गर्मी को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने और संवेदनशील कदम उठाने की जरूरत है। 

जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ी है। गर्मी के बढ़ने से लोगों की परेशानियों भी बढ़ी है। आगे के दिन और अधिक कठिन होने के संकेत हैं। हालात इस कदर बिगड़ जाए कि संभालने में कठिनाई हो इसके पहले ही सरकारें सामूहिक कार्य योजना बनाकर आगे आए तो बहुत हद तक आम लोगों को राहत दी जा सकती है। स्थानीय स्तर पर जिस तरह सर्दियों या बारिश के लिए तैयारी की जाती है उसी तरह अब देश भर में गर्मियों के लिए भी जरूरत के अनुसार पूर्व तैयारी करनी चाहिए। इसके साथ ही साथ शहरों में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश और ऊर्जा उत्पादन की वृद्धि को प्राथमिकता देना होगा ताकि कठिन से कठिन समय में ऊर्जा की आपूर्ति होती रहे। शहरों में अगर पर्याप्त बिजली मिलती रहेगी तो लोग हीट वेव से बचने के लिए कोई ना कोई इंतजाम कर ही लेंगे।        

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