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नई प्रौद्योगिकी से रोजगार सृजन की दरकार

Admin April 20, 2021

पिछले 30 वर्षों में भूमंडलीकरण की अंधी दौड़ ने रोजगार सृजन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। चीन को छोड़ दुनिया के लगभग हर देश में बेरोजगारी बढ़ी है। जहां अमरीका में बेरोजगारी की दर 6.2 प्रतिशत है, इंग्लैंड में 5.1 प्रतिशत, जर्मनी और फ्रांस में यह क्रमशः 5.9 और 8 से 9 प्रतिशत है। बेरोजगारी के कारण सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हुआ है। कुछ समय पूर्व ओईसीडी की एक रपट के अनुसार भारत में 15-29 वर्ष के आयुवर्ग में वर्ष 2017 में 30 प्रतिशत ऐसे युवा थे, जो न तो शिक्षण संस्थानों में थे, न रोजगार में न प्रशिक्षण में (जिसे नीट का नाम दिया गया), यानि बेरोजगार थे। यूरोप के कई देशों में युवा बेरोजगारी 50 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच चुकी है। यानि कह सकते हैं कि विकसित देश हों अथवा विकासशील देश पिछले 30 वर्षों में वे सभी रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं।

भारत की जनसंख्या में लगभग 2 करोड़ लोग हर साल जुड़ जाते हैं। पिछले 30-40 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों के चलते आज जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा है। आज देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 वर्ष से नीचे की है। और इसमें 36 प्रतिशत से ज्यादा 15 से 35 वर्ष के आयुवर्ग में है। इस दृष्टि से दुनिया में सबसे ज्यादा युवा भारत में हैं और इसीलिए भारत को यंगिस्तान भी कहा जाता है। ऐसी स्थिति को जनसांख्यिकी लाभ भी कहा जाता है, क्योंकि युवा जनसंख्या होने का लाभ यह है कि देश उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल कर तेजी से तरक्की कर सकता है। नीति-निर्माताओं को हमेशा यह चिंता रहती है कि कैसे इस जनसांख्यिकी लाभ का इस्तेमाल किया जाए।

लेकिन पिछले 20 वर्षों से लगातार देश चीनी साजोसमान के भारी आयात के चलते विनिर्माण के क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है, इसका असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। बेरोजगारी की समस्या में आज नई प्रौद्योगिकी आग में घी डालने जैसा काम कर रही है। बीते समय में मशीनीकरण के चलते रोजगार पर प्रभाव पड़ा था। इस समस्या का निवारण धीरे-धीरे रोजगार के वैकल्पिक अवसर जुटा कर किया गया। जहां मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार घटा, वहीं उसकी कुछ भरपाई सेवा क्षेत्र से होने लगी। आज के युग में आर्टिफिश्यिल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स, ब्लॉक चेन आदि नई प्रौद्योगिकी रोजगार के अवसरों के लिए खतरा बनी हुई है। जहां पहले कॉल सेंटरों के जरिए रोजगार का सृजन हो रहा था, अब आर्टिफिश्यिल इंटेलीजेंस के चलते कॉल सेंटर में युवाओं के बदले इंटरनेट बॉट्स मशीनें (रोबोट) सवाल-जबाव कर लेती हैं। इसके कारण रोजगार घटने लगा है और आने वाले समय में यह और ज्यादा घट सकता है। वहीं आजकल फैक्ट्रियों, दतर, घरों में कई मानव द्वारा किए जाने वाले कार्यों को रोबोट करने लगे हैं। ड्रोन के माध्यम से वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा और लाया जा रहा है।

यानि देखा जाए तो जहां पहली औद्योगिक क्रांति ने मशीनीकरण के कारण रोजगार घटाया था और यह क्रम दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति में भी चलता रहा। लेकिन जहां मशीनीकरण ने परंपरागत उद्योगों में रोजगार कम किया, लेकिन साथ ही साथ दुनिया में इसके कारण वैकल्पिक रोजगार भी पैदा हुए। हालांकि तीसरी औद्योगिक क्रांति में ही सूचना प्रौद्योगिकी का आगाज हो गया था, लेकिन भारत लगभग इस औद्योगिक क्रांति से अछूता ही रह गया, क्योंकि कम्प्यूटर, इलैक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत शेष दुनिया से पिछड़ गया था। इसलिए इन क्षेत्रों में भारत सीमित मात्रा में ही रोजगार सृजन कर पाया। 

आज भारत के सामने यह चुनौती है कि वह न केवल दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति में अपने असंतोषजनक प्रदर्शन की भरपाई करे, बल्कि चौथी औद्योगिक क्रांति में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले। यह सही है कि रोबोटिक्स, आर्टिफिश्यिल इंटेलीजेंस, ड्रोन इत्यादि के कारण रोजगार के सृजन में कमी आएगी, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नई प्रौद्योगिकी के कारण लागत में भी कमी आती है। उदाहरण के लिए जो कंपनियां आर्टिफिश्यिल इंटेलीजेंस, रोबोट, ड्रोन इत्यादि का उपयोग करती है, उनकी लागत घटती है। लागत घटने पर वह उद्योग बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाता है। लेकिन नई प्रौद्योगिकी के नाम पर रोजगार के अंधाधुंध ह्रास को भी औचित्यपूर्ण नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में नीति-निर्माताओं को प्रौद्योगिकी के चयन के संदर्भ में अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार करना होगा। 

आर्टिफिशल इंटेलीजेंस हो, रोबोट हों, ब्लॉक चेन हों अथवा ड्रोन ये आज के युग में विकास के प्रतीक भी बन रहे हैं। नई खोजें इसी क्षेत्र में हो रही हैं। दुनिया भर में इनकी मांग भी बढ़ रही हैं। पिछले 30 सालों में देश में सॉटवेयर विकास और विज्ञान प्रौद्योगिकी में हमारे युवाओं के बढ़ते कौशल के कारण आज बड़ी संख्या में हमारे युवा इस क्षेत्र में नई खोजें भी कर रहे हैं और इस क्रांति में उनकी बड़ी हिस्सेदारी भी है। ड्रोन उत्पादन के क्षेत्र में भारत के स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं। कई क्षेत्रों में रोबोट का भी विकास तेजी से हुआ है। किसी भी हालत में इस विकास को रोका जाना देश के लिए हितकारी नहीं होगा। आज देश में इस बहस को शुरू करने की जरूरत है कि इन नई प्रौद्योगिकियों को किस प्रकार से बढ़ावा देना है, ताकि एक ओर देश दुनिया में इस क्षेत्र में अग्रणी बन सके, तो दूसरी ओर उपयुक्त प्रौद्योगिकी के चयन के द्वारा देश के सभी प्रकार के युवाओं चाहे वे कुशल हैं अथवा अकुशल सभी को रोजगार भी मिले। 

देश रोबोट उत्पादन, ड्रोन उत्पादन और आर्टिफिश्यिल इंटेलीजेंस में नई ऊंचाईयां छू रहा है। इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हुए, दुनिया में अपना परचम लहराने की जरूरत है। लेकिन अपने देश की जरूरत के मुताबिक ही इन तकनीकों को भारत में अपनाने की जरूरत है।

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