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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का श्रीगणेश — आगे दुनिया और भी है...

Admin August 28, 2020

हमें यह याद रखना होगा कि अयोध्या धाम का विकास यानी रामराज्य का विकास करना है और रामराज्य में किसी के पास भी भौतिक सुख सुविधाओं का अभाव नहीं रहता। — स्वदेशी संवाद


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयोध्या पहुंच राम जन्म भूमि पूजन के साथ ही 5 अगस्त की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। ‘राम काज किन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम’ को चरितार्थ करते हुए प्रधानमंत्री ने राम मंदिर के निर्माण का श्रीगणेश करते हुए राष्ट्र के कल्याण, विश्व में सुख शांति, हिंदू धर्म के उत्थान के साथ-साथ क्षेत्र की समृद्धि का भी संकल्प दोहराया। इस अवसर पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने आपसी शत्रुता व द्वेष मिटाने की पैरोकारी करते हुए कहा कि भगवान राम परिवर्तन के पक्षधर है, इसलिए आने वाले समय में समरस राम हमें सांस्कृतिक मजबूती और समृद्धि की धारा बहाने में प्रेरणा प्रदान करेंगे।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री के हाथों राम मंदिर का षिलान्यास सिर्फ मंदिर आंदोलन को उसकी तार्किक परिणीति तक पहुंचाना भर नहीं है। इसके आगे जहां और भी है। मसलन भारत की आबादी को सांस्कृतिक राष्ट्रीय धारा से जोड़ते हुए भारत वासियों की सुख-समृद्धि की कल्पना तथा इसके लिए आवष्यक नीतियों का निर्माण और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन। मालूम हो कि संघ की प्रेरणा से भाजपा ने जो तीन बड़े लक्ष्य अपने सामने रखें थे, उसमें राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ सामान आचार संहिता तथा कष्मीर से धारा 370 का खात्मा शामिल था। एनडीए-दो के रूप में अपनी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने के पहले चरण में ही लक्ष्य को लगभग साध लिया गया है। गत वर्ष 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से विशेष प्रावधानों वाली धारा 370 को सदा-सदा के लिए विदा कर दिया था। इसके ठीक एक साल बाद 5 अगस्त 2020 को पिछले लगभग 500 सालों से कानूनी पचडे में फंसे राम मंदिर विवाद का पताक्षेप करते हुए भव्य मंदिर निर्माण का श्रीगणेश किया। इसी तरह एक बार में तीन तलाक कहने की कुप्रथा को दंडनीय अपराध घोषित कर सरकार समान आचार संहिता की तरफ भी ठोस कदम बढ़ा चुकी है।

राम मंदिर निर्माण के साथ ही अब रामराज्य की चर्चा शुरू हो चुकी है। रामराज्य का मतलब सुषासन, जिसमें न्याय की प्रतिष्ठा तथा अन्याय का अन्त के साथ-साथ ‘नहीं दरिद्र, कोई दुखी न दीना’। हालांकि यह कल्पना अभी यथार्थ से बहुत दूर की है, लेकिन अयोध्या एक अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ स्थल के रूप में उभरेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। अयोध्या सिर्फ हिंदुओं के लिए ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और सिख धर्मावलंबियों के लिए भी खासा महत्व रखती है। इसलिए इसका विस्तार अवष्यंभावी है। देष के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों की ओर से अयोध्या को केंद्र में रखकर धार्मिक पर्यटन का मॉडल विकसित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

पर्यटन उद्योग किसी भी देष के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा है। भारत में ट्रैवल तथा टूरिज्म सेक्टर का देष की जीडीपी में योगदान वर्ष 2017 में 234 बिलियन डॉलर का था। इसके वर्ष 2020 तक बढ़कर 492 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत एक विविधता से भरा देष है, जहां की बड़ी आबादी पर्यटन तथा इससे समर्थित लघु एवं मध्यम उद्योगों पर निर्भर है। हाल के दिनों में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कई शैक्षणिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, जिसके कारण अब पेषेवर युवा पर्यटन क्षेत्र को अपनी आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। 

ऐसे में अयोध्या एक महत्वपूर्ण मुकाम साबित हो सकता है। अयोध्या के साथ भारत तथा विश्व की करीब 120 करोड़ हिंदू जनसंख्या का विषेष संबंध है। सांस्कृतिक रूप से भी श्रीराम भारत तथा विश्व के हिंदू आस्था के केंद्र है। शहर से लेकर गांव तक हर हिंदू श्रीराम से आत्मिक रूप से जुड़ा है। इस जुड़ाव ने अयोध्या का सांस्कृतिक के साथ-साथ आर्थिक एवं सामरिक महत्व भी कई गुना बढ़ा दिया है। मंदिर निर्माण की योजना ने इस शहर के चौतरफा (84 कोष) ढांचागत विकास का रास्ता एक झटके से खोल दिया है। कई इंडस्ट्री के लोगों ने तो बाकायदा सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि अब हर साल लगभग 10 से 12 करोड़ देषी-विदेषी पर्यटकों का यहां आना-जाना शुरू होगा। जिसके आगे चलकर प्रतिवर्ष 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है। यह अपेक्षित वृद्धि विमानन क्षेत्र के लिए भी एक अवसर की तरह है। ऐसे में अयोध्या को एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट की जरूरत है। बताते हैं कि सरकार इस पर अत्यंत गंभीरता से विचार कर रही है।

अयोध्या के रेलवे स्टेषन की तरह रामायण के सांस्कृतिक संकेतों से जुड़ा यह एयरपोर्ट पर्यटकों के लिए दर्षनीय स्थल साबित होगा। शहर से सटे हुए क्षेत्र में न्यू अयोध्या टाउनषिप के विकास से आने जाने वाले लोगों के लिए रहने ठहरने की उचित सुविधा मिलेगी। साथ ही पूरे अयोध्या क्षेत्र में रियल स्टेट कंपनियों का भी निवेष होगा। इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए भी अवसर उपलब्ध होंगे। पूरे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार द्वारा अयोध्या सर्किट का निर्माण प्रस्तावित है वही सरयू रिवर फ्रंड को विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेष की सरकार ने काम में तेजी लाने का निर्णय लिया है। यहां भगवान राम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना है जो पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र होगी।

अयोध्या से होकर कई राजमार्ग भी गुजरते हैं। अतः यहां तक की यात्रा पूरे उत्तर पूर्वी व मध्य भारत से काफी सुगम है। अयोध्या के साथ-साथ करीब 100 किलोमीटर की परिधि में विभिन्न उद्योगों के विकास की प्रबल संभावना है। विभिन्न क्षेत्रों की एक सैकड़ा से अधिक राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने सरकार के साथ एमओयू साइन करने की इच्छा जताई है। सरकार पुराने अयोध्या में ढांचागत सुधार एवं विकास, रेल यातायात में सुधार, शहर का डिजिटलाइजेषन के साथ-साथ जमीन अधिग्रहण को भी सुगम बनाने के लिए आवष्यक कदम उठा रही है। कोविड महामारी के बाद सरकार यहां के स्वास्थ सुविधा विकास को भी ध्यान में रखे हैं ताकि पर्यटक बिना परेषानी के यहां ठहर सके।

अयोध्या के पूर्ण रूप से विकसित होने से पष्चिम में लखनऊ तथा पूर्व में वाराणसी तक का कारिडोर आर्थिक वृद्धि की ऊंचाई छूने की क्षमता रखता है। इससे एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता है तथा हजारों लघु एवं मध्यम कोटि के व्यापारियों को वृद्धि हासिल हो सकती है। इसके लिए कंप्रिहेंसिव टाउनषिप प्लानिंग तथा तकनीकी विकास के तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए ताकि इस मौके और अवसर का फायदा आमजन को शीघ्र मिलना शुरू हो जाए।

इस विकास के क्रम में एक चीज का विशेष ध्यान रखना होगा कि पुरातन अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए नवीनतम सुविधाएं विकसित की जाए।

हमें यह याद रखना होगा कि अयोध्या धाम का विकास यानी रामराज्य का विकास करना है और रामराज्य में किसी के पास भी भौतिक सुख सुविधाओं का अभाव नहीं रहता। ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज्य का हू नहीं व्यापा’। इसीलिए संघ प्रमुख ने संकेतों में कहा है कि पूरे विश्व के हिंदू समाज के आस्था का केंद्र अयोध्या को इस तरह विकसित करने की आवष्यकता है जहां रोजगार समृद्धि और सुसंस्कृति की अविरल धारा प्रवाहित होती रहे। श्री रामलला विराजमान निष्चय ही यह पुण्य फल प्रदान करेंगे। उनकी जय हो।  

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