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वित्तमंत्री के बंधे हाथ, पर कदम विकास के साथ

Admin February 26, 2021

प्रधानमंत्रा मोदी और वित्तमंत्रा निर्मला सीतारमण के सामने मुख्य लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर दुबारा लाना और 10 फीसदी से अधिक की विकास दर हासिल करना है। इसका रोड मैप इस बजट में दिखाई दे रहा है। — विक्रम उपाध्याय

 

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस बजट में बहुत सारा विकल्प नहीं था। इसलिए किसी को भी इस बात का भरोसा नहीं था कि इस बजट में सरकार कोई बड़ा ऐलान करेगी। खासकर जनसेवा से जुड़ी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा को लेकर लोगों को आशंका थी कि देश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए मोदी सरकार खर्चें को बहुत बढ़ाएगी। लगभग 34 लाख करोड़ के इस बजट में सरकार के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त राजस्व की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई योजनाओं को ज्यों का त्यों रखना पड़़ा। मसलन चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थिति होने के बावजूद रक्षा बजट में कोई बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की गई। मामूली रूप से रक्षा बजट को बढ़ाते हुए 4 लाख 71 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर चार लाख 78 हजार करोड़ किया गया। यह मात्र 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी है।

संसाधनों की कमी पेंशन बजट में भी देखने को मिली। खासकर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के पेंशन की बात करे तो इस बजट में पिछले बजट के मुकाबले 13.4 फीसदी से अधिक की कटौती ही कर दी गई है। देश में लगभग 30 लाख से अधिक सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी हैं। वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बाद वन पेंशन में वृद्धि की आस लगाए इन पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस बात पर घोर निराशा हुई कि 2021-22 के बजट में पेंशन के मद में 1 लाख 15 हजार 826 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले साल यह राशि 1 लाख 33 हजार 804 करोड़ रुपये की थी।

आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए यह उम्मीद थी कि इस बार गृह मंत्रालय के बजट में भी बढ़ोतरी होगी, लेकिन यहां भी बजट 2021-22 में कटौती ही देखने को मिली है। पिछले साल गृह मंत्रालय के लिए 1 लाख 67 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, लेकिन इस बार के बजट में यह राशि 1 लाख 66 हजार करोड़ रुपये की है। यानी गृहमंत्रालय को भी मितव्ययिता का पालन करना पड़ेगा।

कोविड के कारण खेल की दुनिया सबसे अधिक प्रभावित हुई। धीरे-धीरे अब खेलों की प्रतियोगिताएं शुरू हो रही हैं। लगभग 10 महीने से बंद स्टेडियम को चालू करने और उनमें फिर से गतिविधियों को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन इस बार के बजट में वित्तमंत्री ने खेलकूद से जुड़े विभागों और एसोएशिनों के बजट में अच्छी खासी कैची चला दी है। स्पोर्स्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (यानी साई) के बजट में पिछले साल के मुकाबले लगभग 230 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई है। यह लगभग 8 फीसदी है। खेलो इंडिया का पिछले साल का बजट 890 करोड़ का था, इस बार इसे घटाकर 657.71 करोड़ रुपये का कर दिया गया है।

पूरे साल भर लगभग पढ़ाई बंद रही। अभी भी स्कूलों में हाजिरी आधी से भी कम है। जाहिर है स्कूलों को पुरानी स्थिति में लाने में कुछ और समय लगेगा। इसके अलावा छात्रों को बेहतर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं देने और खान-पान में सावधानी रखने के लिए भी अतिरिक्त फंड की आवश्यकता होगी। लेकिन कोविड के कारण आर्थिक संकट जो उपजा, उसका असर शिक्षा के बजट पर भी पड़ा है। वर्ष 2021-22 के बजट में शिक्षा के लिए 93,224 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि पिछले साल यह आवंटन 99,312 करोड़ रुपये का था। यानी पिछले साल के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत की कमी शिक्षा बजट में की गई है।

ग्रामीण क्षेत्र की सबसे बड़ी रोजगार योजना महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्पलॉयमेंट गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के बजट में तो इस बार भारी कटौती कर दी गई है। वित्तमंत्री ने वर्ष 2021-22 के बजट में मरनेगा के लिए 73 हजार करोड़ के आवंटन की घोषणा की, जबकि पिछले साल यह राशि 1 लाख 11 हजार करोड़ की थी।

एक बारगी ये कटौतियां देखने में ऐसा लगती हैं कि सरकार संसाधनों को जुटाने में जूझ रही है। संभवतः वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार के लिए राजस्व का लक्ष्य पाना पूरी तरह से संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि सरकार बहुत कुछ विदेशी कर्जों पर निर्भर है। 34 लाख 83 हजार करोड़ के इस बजट में नेट आय केवल 19 लाख 76 हजार करोड़ रुपये के होने का आकलन किया गया है, बाकी राशि विदेशों या अन्य कर्ज स्रोतों से ही जुटाए जाने हैं। जाहिर है सरकार के सामने अभी चुनौतियां बहुत हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के सामने मुख्य लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर दुबारा लाना और 10 फीसदी से अधिक की विकास दर हासिल करना है। इसका रोड मैप इस बजट में दिखाई दे रहा है।

बजट में सबसे ज्यादा जोर पूंजीगत व्यय या कैपिटल एक्सपेंडिचर पर दिया गया है। सभी कोर सेक्टर में पूंजी का प्रवाह बढ़ाने के लिए इस बार के बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले साल के मुकाबले 34.5 प्रतिशत अधिक है।

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