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विश्व योग दिवस: योगस्य चित्त वृत्ति निरोध 

योग केवल शरीर को मोड़ने या कुछ आसान करने का अभ्यास नहीं है। यह आत्मा में छिपे ज्ञान के दीप को प्रज्वलित करने का मार्ग है। - डॉ. दिनेश प्रसाद मिश्र

 

पूरी दुनिया में 21 जून 2026 को 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अत्यंत उत्साह के साथ आयोजित हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत के इस पारंपरिक स्वदेशी ज्ञान को दुनिया न सिर्फ आगे बढ़कर स्वीकार कर रही है, बल्कि इसे अपने जीवन शैली में शामिल कर एक से एक कठिन और असाध्य रोगों से छुटकारा पा रही है, लाभान्वित हो रही है। योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य उपहार है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक संपूर्ण जीवन-पद्धति है।

12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत में एक बार फिर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और स्वस्थ जीवन शैली की ताकत का परिचय दुनिया को कराया है। देश में कश्मीर की वीडियो से लेकर कन्याकुमारी के समुद्र तट और मैदान से लेकर लद्दाख की ऊंची चोटियों तक करोड़ों लोगों ने उत्साह के साथ स्वयं भी योग किया और दूसरे को भी योग के लिए प्रोत्साहित किया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कोलकाता में योगाभ्यास किया और योग शिविर में पहुंचे लोगों को भी योग के तरीके और योग से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी साझा की। योग की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि योग सिर्फ कसरत नहीं है। यह किसी खास उम्र के लिए नहीं है। यह मानवीय भावना की अभिव्यक्ति है। रोज के जीवन में काम, खान-पान और नींद के बीच सही तालमेल तमाम तरह की विपदाओं को खत्म करने का रास्ता है।

भारत के प्राचीन और पारंपरिक ज्ञान यह शिक्षा देते  हैं कि मनुष्य का जीवन केवल बाहरी उपलब्धियों, प्रतियोगिताओं और भौतिक सुखों तक सीमित नहीं। जीवन का उद्देश्य अपने भीतर छिपी शक्ति, ज्ञान और चेतना को पहचानना है। आज समाज का एक बड़ा वर्ग  मानसिक दबाव, असफलता के भय, चिंता और तीव्र  प्रतिस्पर्धा से घिरा हुआ है। ऐसे समय में योग और ध्यान जीवन को संतुलित करने की एक महान कला के रूप में सामने आते हैं।

योगस्य चित्तवृत्ति निरोध 

योग केवल शरीर को मोड़ने या कुछ आसान करने का अभ्यास नहीं है। यह आत्मा में छिपे ज्ञान के दीप को प्रज्वलित करने का मार्ग है। जब मनुष्य अपने मन को नियंत्रित करना सीख लेता है तब वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना भी शांत और दृढ़ होकर कर सकता है। अज्ञान भय आलस और निराशा का अंधकार तभी दूर होता है जब मन संयमित हो, विचार सकारात्मक और लक्ष्य स्पष्ट। योग मनुष्य को यही शक्ति प्रदान करता है।

कहा गया है कि जब जीवन में अंधेरा बढ़ता है तभी भीतर के प्रकाश को खोजने का अवसर मिलता है। अंधकार कभी प्रकाश को पराजित नहीं कर सकता। एक छोटा सा दीपक भी पूरे कमरे को रोशन कर देता है। योग वही दीपक है जो हमारे भीतर ज्ञान संस्कार, आत्मविश्वास और सफलता का प्रकाश जगाता हैं।

भारतीय योग परंपरा में नादयोग ज्ञान को अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावशाली साधन माना गया है। नाद का अर्थ है ध्वनि और योग का अर्थ जुड़ना, यानी नाद योग वह साधन है जिसके माध्यम से साधक अपने भीतर की चेतना से जुड़ने का प्रयास करता है। यह केवल संगीत सुनने या मंत्र जपने की विधि नहीं, आत्मा के भीतर उत्पन्न होने वाली सूक्ष्म ध्वनियों को अनुभव करने की प्रक्रिया है। 

आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि पूरा ब्रह्मांड ऊर्जा और कंपन्न से निर्मित है। प्रत्येक ग्रह, तारा, जीव और वस्तु अपनी एक विशेष आवृत्ति पर कंपन कर रहा है। ध्वनि भी ऊर्जा का एक रूप है जो मानव मस्तिष्क और शरीर पर गहरा प्रभाव डालती है। मधुर ध्वनिया मन में शांति और प्रसन्नता उत्पन्न करती है। नाद योग में साधक धीरे-धीरे बाहरी शोर से हटकर अपने भीतर की सूक्ष्म ध्वनि को सुनने का प्रयास करता है। यही अभ्यास मन को स्थिर करता है और चेतना को ऊंचे स्तर तक ले जाता है।               

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