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स्वदेशी केवल विचार नहीं, आत्मनिर्भर भारत का आधार: कश्मीरी लाल

By Administrator • 20 May 2026
स्वदेशी केवल विचार नहीं, आत्मनिर्भर भारत का आधार: कश्मीरी लाल

स्वदेशी जागरण मंच की अखिल भारतीय चिंतन बैठक के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर होटल अनुरागा पैलेस (सवाई माधोपुर) में “स्वदेशी संवाद” कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, व्यापार, उद्योग, कृषि एवं सामाजिक जीवन सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वदेशी, आत्मनिर्भरता एवं भारतीय जीवनदृष्टि पर सार्थक मंधन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वदेशी केवल देश में निर्मित वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं है. बल्कि यह भारतीय जीवनदृष्टि, आत्मगौरव, स्थानीय अर्थव्यवस्था के संरक्षण एवं प्रकृति के साथ संतुलित विकास का व्यापक विचार है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी व्यक्ति को अंधानुकरण एवं उपभोक्तावाद से निकालकर समाज, संस्कृति और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि स्वदेशी को केवल विचार के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की व्यवहारिक शैली के रूप में अपनाया जाए।

राष्ट्रीय संयोजक श्री आर. सुन्दरम ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट एवं बढ़ती उपभोक्तावादी प्रवृत्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व पुनः स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं, विकेंद्रीकृत उत्पादन एवं आत्मनिर्भर व्यवस्था की आवश्यकता को अनुभव कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की विचारधारा केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए संतुलित एवं स्थायी विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करती है। स्वदेशी स्थानीय संसाधनों, कौशल एवं भ्रम को सम्मान देकर आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करता है तथा समाज को आत्मविश्वासी एवं आत्मनिर्भर बनाता है।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय महिला प्रमुख अर्चना मीना ने कहा कि स्वदेशी भारत की आत्मा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भर भविष्य का आधार है। स्थानीय उत्पादों, कौशल एवं संसाधनों को अपनाकर ही मजबूत राष्ट्र निर्माण की दिशा में सार्थक योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी का भाव समाज में आर्थिक सम्यक्तिकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान को भी मजबूत करता है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों के बीच स्वदेशी के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्याहरणीय आयामों पर विस्तृत एवं सार्थक संवाद हुआ। पूरे वातावरण में राष्ट्रचिंतन, भारतीयता एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की स्पष्ट अनुभूति दिखाई दी।

अंत में अर्चना मीना ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संवाद समाज में जागरूकत्ता एवं सकारात्मक परिवर्तन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यक्रम का समापन स्वदेशी विचार को जन-जन तक पहुँचाने तथा उसे व्यवहार में उतारने के संकल्प के साथ हुआ।

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